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शनिवार, 9 मई 2015

आत्म मंथन

आत्म मंथन
ठहरे जल को
गंदगी दूषित कर
सड़ने लगती
बहती नदी में गंदगी
मंझधार से हट कर
किनारों पर चली जाती
जल को दूषित होने से
बचाती
निरंतर आत्म मंथन से
मन की गंदगी भी
किनारे पर चली जाती
सोच को स्वच्छ
आचार व्यवहार को
मधुर बनाती
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
सोच,आत्ममंथन,जीवन, आचार व्यवहार

32-09-05-2015

खरा सिक्का

खरा सिक्का
सच को झूठ
झूठ को सच कहना
अब आम हो गया है
होड़ के दौड़ में
येन केन प्रकारेण
जीतना ध्येय हो गया 
जो जीत गया
उस के सर पर ताज 
जो हार गया
वो कमजोर खिलाड़ी 
जो चल गया
वो खरा सिक्का 
जो ना चला
कितना भी अच्छा हो
खोटा सिक्का हो गया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
31-09-05-2015

सच,झूठ,हार,जीत,जीवन,

त्रासदी

(नेपाल में भूकम्प त्रासदी पर)
त्रासदी
प्रकृति के रौद्र पर
मानव संहार पर
हृदय व्यथित
मन बेचैन
सोच जड़
कलम चुप है
नम आँखों से
मृत आत्माओं को
शत शत नमन है
निश्छल हृदय से
श्रद्दांजलि अर्पण है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
भूकम्प,त्रासदी,प्राकृतिक विपदा

30-09-05-2015

बड़े बूढ़ों की छत्र छाया में

बड़े बूढ़ों की छत्र छाया में
बड़े बूढ़ों की
छत्र छाया में समय
कितनी सरलता से
गुजरा
कभी अहसास
तक नहीं हुआ
उनके सब्र के पैमाने
स्थितियों से
निबटने के तरीके
कभी सार्थक नहीं लगे
आज जब वो नहीं हैं
उनकी सार्थकता का
पता चल रहा है
स्वयं पर क्रोध आ रहा है
उनके जीवन काल में
उनके सोच
उनके अनुभव और 
व्यवहार को
क्यों समझ नहीं पाया
मन ग्लानि से रो रहा है

डा,राजेंद्र तेला,निरंतर
29-09-05-2015

बड़े बूढ़े,बुजुर्ग,अनुभव ,जीवन

शुक्रवार, 8 मई 2015

किसे याद रहती हैं सिसकी गरीब की

किसे याद रहती हैं सिसकी गरीब की
किसे याद रहती
सिसकी गरीब की
किसने समझी
ज़िन्दगी गरीब की
किसने खाई
रोटी गरीब की
किसने पौछी
अश्रुधारा गरीब की
किसने भुगती
त्रासदी गरीब की
किसने महसूस करी
लाचारी गरीब की
किसने देखी 
झोपडी गरीब की
किसने लड़ी
लड़ाई गरीब की
सब बात तो करते हैं
गरीबी मिटाने की
काम ऐसे कर रहे हैं
एक दिन
मिट जाएगा गरीब ही
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
28-08-05-2015

गरीब, गरीबी

नारी ,

नारी
पुरुष के पीछे
अर्धांगिनी बन कर
खडी होती है नारी ,
सुख दुःख में
साथ देती है नारी
सफलता में
सहायक होती है नारी
पुरुषों से
अधिक सहनशील
अधिक सहती है नारी 
ममत्व में स्नेह की
पराकाष्ठा होती है नारी
शक्ति का रूप
धैर्य का प्रतीक
महान होती है नारी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

नारी 
27-08-05-2015

गुरुवार, 7 मई 2015

रूठना मनाना

रूठना मनाना
किस को मनाऊं
कैसे मनाऊं
मन को मनाऊं
लोगों को मनाऊं
मन को मनाऊं
तो लोग नाराज़
लोग नाराज़ तो
नया दुश्मन बनाऊं 
लोगों को मनाऊं
तो मन नाराज़
मन नाराज़ तो
जीना दुश्वार
समझ नहीं आता
किस को मनाऊं
कैसे मनाऊं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
26-07-05-2015

जीवन,रूठना मनाना

सब कुछ है फिर भी कुछ नहीं हैं


सब कुछ है
फिर भी कुछ नहीं हैं
घोड़े हैं
तो मैदान नहीं
मैदान है
तो घोड़े नहीं
घोड़े भी हैं
मैदान भी है
मगर मन नहीं
तो कुछ नहीं
सब कुछ है
फिर भी कुछ नहीं हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
मन,जीवन

25-07-05-2015

What to say? What not to say?

What to say? What not to say?
What to say?
What not to say?
When to say?
When not to say?
Always remains
A burning question
Saying anything
May be
Pleasant for one
Unpleasant
For the other
So whenever
One has to say
Before saying
One has to think
Twice
Learn the right
Way of saying
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
COMMUNICATION,

25-07-05-2015

बुधवार, 6 मई 2015

अवरोधों की आँधियों के बीच

अवरोधों की आँधियों के बीच
वृक्ष के पत्ते सा
फड़फड़ाया हूँ
निराशा की
गर्मी में झुलसा हूँ
असफलता के
आसूओं की
वर्षा में भीगा हूँ
अतिवृष्टि से त्रस्त
पंछी जैसे सहमा हूँ
कैक्टस जैसे ज़िया हूँ
भाग्य से लड़ता रहा हूँ
अवरोधों की
आँधियों के बीच
जीवन के मरुस्थल में
अविचल खड़ा हूँ
विश्वास से भरपूर हूँ
हरीतिमा की आशा में
टूट कर जुड़ता रहा हूँ
अब भी हार नहीं मानूंगा
जीत कर दिखाऊंगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन,अविचल,अवरोध,दुःख ,सुख

24-06-05-2015

मन का शैतान

मन का शैतान
झाँका जो
मन के अंदर
सुन्दर चेहरे वाला
शैतान नज़र आया
कब से बैठे हो
चुप क्यों हो
बाहर आकर दुनिया को
अपना सुन्दर चेहरा
क्यों नहीं दिखाते
शैतान ने
अट्टाहास किया
आँख
मटकाते हुए बोला
चुप रह कर भी
जो चाहता हूँ
तुम से करवा लेता हूँ
बाहर आ जाऊंगा
तो तुम्हारे चेहरे पर चढ़ा
चेहरा उतर जाएगा
लोगों को तुम्हारे सत्य
पता चल जाएगा
मुझे भी दूसरा
ठिकाना ढूंढना पड़ेगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
मन,शैतान,जीवन,चेहरे पर चेहरा

23-06-05-2015

मंगलवार, 5 मई 2015

ज़ख्मों की सीमाएं

ज़ख्मों की सीमाएं
ज़ख्मों की भी
सीमाएं होती होगी
दर्द की भी
इंतहा होती होगी
मुझे तो पता नहीं
किसी को पता हो
तो बता दे
दर्द से मुक्ति नहीं तो
लक्ष्य का तो पता
चल ही जाएगा
कितना और सहना है
मालूम हो जाएगा
चैन का
सूरज कब उगेगा
आशाओं को
उत्तर मिल जाएगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
दुःख,दर्द,आशाएं,चैन,जीवन 

22-05-05-2015

जीवन एक कहानी

जीवन एक कहानी
हर कहानी में
कुछ पात्र होते हैं
कुछ अच्छे कुछ बुरे
कुछ गौण रहते हैं
हर कहानी का अंत
सुखद दुखद
या सम रहता है
जीवन ऐसा ही होता है
घटनाएं,भावनाएं
आचार व्यवहार,सोच
पात्रों की पूर्ती करते हैं
कहानी का अंत
सुखद हो या दुखद हो
आकाश में बैठे
कहानी के रचियेता पर
निर्भर करता है
मनुष्य केवल
अभिनय करता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन,कहानी

21-05-05-2015

हर चेहरे के कई अक्स हर अक्स में कई दरारें

हर चेहरे के कई अक्स हर अक्स में कई दरारें
हर चेहरे के कई अक्स
हर अक्स में कई दरारें
हर दरार में खुदगर्ज़ी का 
खूबसूरत इंद्र धनुष
कितनी देर भरमाएगा
कितनी देर लुभाएगा
खुद में इतना डूबा है
कब ग़ुम हो जाएगा
खुद चेहरे को पता नहीं
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
अक्स,दरार, चेहरा,ज़िंदगी

21-05-05-2015

कहने से नहीं करने से होता है

कहने से नहीं करने से होता है
कहने से नहीं
करने से होता है
सुनने से नहीं
समझने से होता है
सोचने से नहीं
निर्णय से होता है
जिसने जान लिया
मन में बिठा लिया
उसका जीवन
सरल होता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन मन्त्र,जीवन

20-05-05-2015

सोमवार, 4 मई 2015

कैसा हृदय तुम्हारा कैसा मन का संसार तुम्हारा

कैसा हृदय तुम्हारा
कैसा मन का संसार तुम्हारा
================
कैसा हृदय तुम्हारा
कैसा मन का
संसार तुम्हारा
कैसा सोच तुम्हारा
निरंतर लोगों की
कमियां ढूंढते हो
व्यक्तित्व पर
प्रश्न खड़े करते हो
स्वयं निष्कर्ष निकालते हो
स्वयं ही निर्णय करते हो
मनोभाव से चर्चा करते हो
कभी लोगों की
अच्छाइयाँ भी देख लो
अपने मन के
अंदर भी झाँक लो
अच्छाइयों
बुराइयों को टटोल लो
मनुष्यता की
कसौटी पर तोल लो
स्वयं पर कटाक्ष करो
नहीं कर सकते हो तो
कटाक्ष करना छोड़ दो
लोगों को
तोलना बाद कर दो
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
19-04-05-2015
जीवन,अच्छाइयाँ ,बुराइयां,कटाक्ष

मन के जाले

मन के जाले
जाले मकड़ी ही नहीं
मनुष्य भी बनाते हैं
मकड़ी के जालों में
कीड़े उलझ कर
मकड़ी का भोजन
बन जाते हैं
मनुष्य के मन में बने
सोच के जाले
निरंतर मनुष्य को ही
भोजन बनाते हैं
मनुष्य
बाहर निकलने का
जितना प्रयास करता
उतना ही
उलझता जाता है
जीवन पर्यन्त
छटपटाता रहता है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
18-04-05-2015

सोच,कुंठा,जीवन,

वक़्त ही तो बदला है

वक़्त ही तो बदला है
कभी आँखों में
हर दिन
नया ख्वाब रहता था
वक़्त ही तो बदला है
मगर अब आँखों में
दर्द का साया रहता है
उम्मीदों का
चमकता सूरज
अब अँधेरे में डूब गया है
महते फूलों के बीच
रहने वाला
अब सूखे फूल
किताबों में रखता है
उन्हें देख कर
बीते वक़्त को याद कर
मुस्कारने की
कोशिश करता है
मगर लब भी साथ नहीं देते
कोई नया दर्द छुपा है
सोच कर लब तक
खामोश हो जाते हैं
सहने के लिए
मुझे तनहा छोड़ देते हैं
वो भी क्या दिन थे
याद कर तन्हाई में
आसूं बहाता है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
दर्द,वक़्त,समय,ज़िंदगी,

17-04-05-2015

रविवार, 3 मई 2015

हँसने पर सवाल खड़े किये गए

हँसने पर सवाल खड़े किये गए
मेरे हँसने पर
सवाल खड़े किये गए
मेरे रोने पर
सवाल पूछे गए
मेरे अंदाज़ पर
फिकरे कसे गए
मेरी हर बात पर
तज़किरे होते रहे
कितना खुस्किस्मत हूँ
नफरत से ही सही
हमेशा लोगों के
ख्यालों में बसा रहा
मेरे सिवाय उन्हें कभी
कोई नज़र ही नहीं आया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
तज़किरा=चर्चा
खुशकिस्मत,नफरत,जीवन,

16-02-05-2015

नादान सोचते हैं

नादान सोचते हैं
बजाते हैं
घंटे मंदिर में
देते हैं अज़ान
मस्जिद में
दूसरों का चैन
छीनते हैं
खुदा बहरा है
नादान सोचते हैं
मिलेगा खुदा उन्हें ही
इस ख्याल में जीते हैं
दिल में नफरत
रखते हैं
भूल जाते हैं
खुदा को दुआ से
ज्यादा कर्म ईमान
पसंद है
इंसान से इंसान का
प्यार पसंद है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
15-02-05-2015

मंदिर,मस्जिद,खुदा,ईश्वर,भगवान

वर्चस्व के लिए

वर्चस्व के लिए
वर्चस्व के लिए
अँधेरे उजाले में
द्वन्द्व हो गया
सवेरे उजाला
रात को अन्धेरा जीतता
द्वन्द्व की सूचना
चाँद सूरज को मिली
दोनों की त्योरियां चढ़ गयी
अविश्वास में भोएं तन गयी
चाँद सूरज ने उजाले अँधेरे को
बुला कर फटकारा
फिर स्नेह से समझाया
देते हम हैं
वर्चस्व के लिए
तूँ तूँ में में तुम करते हो
कृतघ्न ना बनो
हमारे ह्रदय को पीड़ा
ना पहुँचाओ
उजाला अन्धेरा एक साथ बोले
पृथ्वी पर भी तो यही होता है
राज जनता देती है
वर्चस्व के लिए नेता 
द्वंद्व में उलझे रहते हैं
प्रजा का ध्यान कहाँ रखते है?
काम कम
तूँ तूँ में में अधिक करते हैं
चाँद सूरज ने प्रत्यत्तर में कहा
इस कारण ही प्रजा
नेताओं नफरत करती  है
अगर चाहते हो सब
तुम्हारा सम्मान करें
लड़ना झगड़ना छोडो
व्यवहार में सुधार करो  
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
प्रजा,नफरत,नेता,जीवन

14-02-05-2015