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शनिवार, 2 मई 2015

Positive Thought

Positive Thought
If the thought
Is positive
The intent right
Every new day
Becomes
A good day
Remaining calm
In difficulties
Cool in agony
Smiling more
Than crying
Makes life
Easy and rosy
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
Positive thought,intent,life,

13-02-05-2015

मेरे" मैं" ने मुझ को मारा

मेरे" मैं" ने मुझ को मारा
मेरे" मैं" ने मुझ को मारा
मैं ही जीता ,मैं ही हारा
मैं ही ज्ञानी मैं ही अज्ञानी
किसी और को क्या दोष दूं
जब तक रहेगा "मैं" साथ मेरे
पल पल मारेगा मुझे
जी कर भी जी ना सकूंगा
हर पल रोता रहूँगा
कुंठाओं के जाल से
कभी ना निकल सकूंगा
आज तक समझ ना पाया
कैसे पीछा छुडाऊँ मेरे" मैं" से
अब तय कर लिया है
कुंठा मुक्त जीना है तो
मेरे" मैं" को मारना होगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
12-02-05-2015

अहम,घमंड,मैं,गरूर,जीवन,जीवन मन्त्र

तन्हा होते हुए भी तन्हा नहीं हूँ

तन्हा होते हुए भी तन्हा नहीं हूँ
===================
तन्हा होते हुए भी
तन्हा नहीं हूँ
दिन में उजाला
साथ देता है
रातों में चांदनी
साथ निभाती  है
मन के अँधेरे को
कम करती है
यादों को
काबू में रखती हैं
निराशा के भंवर में
डूबने से बचाती हैं
हर सुबह ज़िंदगी को
नयी उम्मीद से
सरोबार रखती है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
उम्मीद,निराशा,जीवन
11-02-05-2015

रास्ता बदल लेते हैं लोग

रास्ता बदल लेते हैं लोग
साथ चलते चलते
रास्ता
बदल लेते हैं लोग
अपने से पराया
बन जाते हैं लोग
शक की दीवारें
खींच देते हैं लोग
चेहरे से नकाब
उतार देते हैं लोग
रिश्तों से यकीन
उठा देते हैं लोग

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
10-02-05-2015

दोस्त,रिश्ते

कर्म फल

कर्म फल 
=======
बचपन में कर्म से
मुंह चुराता रहा
खेल कूद में
समय बिताता रहा
जवानी में जोश
सर पर चढ़ गया
इच्छाओं का दास
बन गया
होड़ के मकड़ जाल में
फंस गया
ना इच्छाएं पूरी हुई
ना जोश बाकी रहा
होश आया तब तक
बुढ़ापा आ गया
अब बचपन को
याद कर के रोता है
कर्म से ही फल मिलता है
अब समझ आ गया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
09-02-05-2015
जीवन,कर्म,बचपन,बुढ़ापा,होड़,इच्छाएं

कुंठा मुक्त जीता हूँ

कुंठा मुक्त जीता हूँ
श्रेष्ठ हूँ भी नहीं
श्रेष्ठता की चाह भी नहीं
श्रेष्ठता के मापदंडों पर
खरा उतरने का
ना सामर्थ्य
ना निपुणता मेरे पास
ना ही प्रशंसा के लिए
चाटुकारिता अपना कर
आत्मा को
ठेस पहुंचाना संभव
जैसा भी हूँ
प्रसन्न हूँ
ना किसी से होड़
ना ईर्ष्या द्वेष
त्रुटियों से सीख कर
सुधार का
प्रयास करता हूँ
निरंतर
अविरल अविचल
कर्म पथ पर चलता हूँ
कुंठा मुक्त जीता हूँ

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन,श्रेष्ठ

08-02-05-2015

काश

काश
काश गुलाब सा
महक सकता
सदा बहार सा
खुश रह सकता
छुइ मुई सा
शरमा सकता
पलाश सा
हँस सकता
कमल सा
खिल सकता
लता सा
मचल सकता
वृक्ष बन कर
जी सकता
हर मौसम में
झूमता रहता
हर मन को
भा सकता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
07-02-05-2015

जीवन

तितलियाँ

तितलियाँ
कुछ दिनों की
ज़िंदगी
में भी लुभाती हैं
तितलियाँ
रंग बिरंगे लिबास में
जलवा दिखाती हैं
तितलियाँ
हर फूल पर
जान लुटाती हैं
तितलियाँ
ज़िंदगी
कैसे जीनी चाहिए
सिखाती हैं
तितलियाँ
खामोशी से
दुनिया में आती हैं
तितलियाँ
ख़ामोशी से जाती हैं
तितलियाँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
06-02-05-2015

तितलियाँ

शुक्रवार, 1 मई 2015

प्रेम ही जीवन है

प्रेम ही जीवन है
कल रात
चाँद जब बादलों के
पीछे छुपने लगा
चांदनी भी
घर की दीवारों को
छू कर सिमटने लगी 
बोझिल हृदय से उसे
यूँ घर के दरवाज़े से
लौटने का
उलहाना दे दिया
चन्द्रमा के अस्तित्व में
मेरा अस्तित्व है
प्रेम का प्रतीक है
प्रेम ही जीवन है
कह कर चन्द्रमा के साथ
चांदनी भी लुप्त गयी

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
05-01-05-2015 
प्रेम,जीवन,चांदनी,चाँद ,