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रविवार, 10 मई 2015

माँ,तुम हो देवी अवतार

माँ,तुम हो देवी अवतार
माँ कहाँ से लायीं तुम
ये प्रेम स्नेह ममत्व
धैर्य कर्तव्य की
अथाह धन सम्पदा
किसने दिया तुम्हें
सहनशीलता सहृदयता
संवेदनशीलता का उपहार
माँ तुम अहम
अहंकार से परे हो
जीवों में अतुल्य हो
मुख से कुछ नहीं कहोगी
तो भी  करना पड़ेगा 

सच स्वीकार
माँ तुम हो देवी अवतार
करती हो संतान का 

बेडा पार 
तुम्हें शत शत नमन
तुम पर जीवन अर्पण

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
माँ ,ममत्व,मातृत्व,स्नेह 

34-10-05-2015

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