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शनिवार, 9 मई 2015

खरा सिक्का

खरा सिक्का
सच को झूठ
झूठ को सच कहना
अब आम हो गया है
होड़ के दौड़ में
येन केन प्रकारेण
जीतना ध्येय हो गया 
जो जीत गया
उस के सर पर ताज 
जो हार गया
वो कमजोर खिलाड़ी 
जो चल गया
वो खरा सिक्का 
जो ना चला
कितना भी अच्छा हो
खोटा सिक्का हो गया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
31-09-05-2015

सच,झूठ,हार,जीत,जीवन,

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