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मंगलवार, 5 मई 2015

हर चेहरे के कई अक्स हर अक्स में कई दरारें

हर चेहरे के कई अक्स हर अक्स में कई दरारें
हर चेहरे के कई अक्स
हर अक्स में कई दरारें
हर दरार में
खुदगर्ज़ी का इंद्र धनुष
दिखने में खूबसूरत
कितनी देर भरमाएगा
कितनी देर लुभाएगा
खुद में इतना डूबा है
कब ग़ुम हो जाएगा
खुद चेहरे को पता नहीं
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
अक्स,दरार, चेहरा,ज़िंदगी

21-05-05-2015

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