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शनिवार, 18 अक्तूबर 2014

क्या हुआ अगर आज मन उदास है


क्या हुआ अगर
आज मन उदास है
मन को मनाऊंगा
हृदय को समझाऊंगा
कल स्थितियों से
समझौता कर लूंगा
अगर बार बार
ऐसा ही होता रहेगा
तो कब तक
मन को मनाऊंगा
हृदय को समझाऊंगा
एक दिन थक जाऊंगा
निराशा के भंवर में
डूब जाऊंगा
भाग्य को दोष दूंगा
उदासी तो फिर भी
दूर नहीं कर पाऊंगा
क्यों ना फिर
जो हो रहा है उसे
खुशी से स्वीकार करूँ
सकारात्मक
सोच रख कर
सार्थक करने का
प्रयास करता रहूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
525-16-18--10-2014

सकारात्मक सोच, जीवन,जीवन मन्त्र, भाग्य,

व्यक्तित्व के दाग


कपड़ों पर
दाग लग जाए
तुरंत बदल लेते हो
पाँव पर
कीचड लग जाए
तुरंत धो लेते हो
कुर्सी धूल से भरी ही
झाड़ पौछ कर बैढते हो
मन में ईर्ष्या द्वेष का
गंद भरा हो
ज़ुबान से कड़वे बोल
निकलते हो
हृदय में नफरत के
गोदाम भरे हो
सहेज कर रखते हो
जिनसे जीवन
सुधर सकता है
उनसे दूर रहते हो
वयक्तित्व पर लगे
दाग़ों को
कीमती गहनों सा
सम्हाल कर रखते हो
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
524-15-18--10-2014
जीवन,जीवन मन्त्र, वयक्तित्व


इच्छा


इच्छा है
जीवन वृक्ष के पत्ते
भले ही कम हो जाए
देखने में
तरो ताज़ा ना लगे
पंछी घोंसले नहीं 
बनाएं
राहगीरों को
छाया भी नहीं दे सके
पर कभी सूख कर
बेबस ठूठ नहीं बने
कुल्हाड़ी से कटे भी तो
कुछ हरे पत्ते लिए
मरने के बाद भी
लोग उसकी
जिंदादिली को 
याद रखें
उसके जैसे ही
जीने की 
इच्छा रखें
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
523-14-14--10-2014

जीवन,बेबस,इच्छा

सोमवार, 13 अक्तूबर 2014

पाकीजगी


मेरी हवस नहीं
दिल की सदा है
मेरे ज़ज्बात हैं
मेरा मन है
जो तुम को बुलाता है
मोहब्बत के खातिर नहीं
तुम्हारी पाकीजगी की 
वज़ह से
तुम्हारी नजदीकियां
चाहता हूँ 
बहुत खुद गर्ज़ हूँ
तुम्हारे जैसे ही
पाक बनना चाहता हूँ

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

522-13-13--10-2014
पाक,पवित्रता,पाकीज़गी,हवस,शायरी

मेरा भी हश्र ऐसा ही होगा


खुशी होती है
जब एक कली फूल
बन कर महकती है
किसी को दुःख हो ना हो
मुझे दुःख होता है
जब फूल की पंखुड़ियां
मुरझा कर धरती पर
गिरती हैं
मेरी खुशी और दुःख से
किसी को कोई
फर्क नहीं पड़ता है
प्रकृति के 
नियम का पालन 
सैदेव होता रहा है
सैदेव होता रहेगा
जानता हूँ एक दिन
मेरा भी 
हश्र ऐसा ही होगा
कोई दुखी होगा
कोई चुपचाप 
देखता रहेगा
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
521-12-13--10-2014

दुःख,सुख,ख़ुशी,प्रकृति,जीवन

आज मिलते हैं कल बिछड़ जाते हैं


लोग
आज मिलते हैं
कल बिछड़ जाते हैं
ना जाने कौन सा
दस्तूर निभाते हैं
रुलाने के तरीके तो
और भी बहुत हैं
समझ नहीं पाता
अपना बन कर
क्यों रुलाते हैं
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
520-11-13--10-2014

मिलना,बिछड़ना,जीवन

रविवार, 12 अक्तूबर 2014

अपना पराया


मुझे रंज है
उससे जिस ने दिया
नाम अपने पराये का
वो अपने भी
अपने कैसे हुए
जो कभी दे ना सके
प्यार अपनों को
वो पराये भी
पराये कैसे हुए
जो देते हैं अपनों से
ज्यादा प्यार हम को
अब तोड़ दो जंजीरें
अपने पराये की
उसे ही अपना मान लो
जो अपना समझ कर
प्यार देता है हम को
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
519-10-12--10-2014

अपना,पराया,प्यार,अपनत्व,जीवन

आशा में जीता हूँ


दुखी हूँ
अत्यधिक दुखी हूँ
अब थक गया हूँ
कब तक सहता रहूँ
सोचता रहता
कहता रहता तो
अब तक निराशा में
संसार  से
विदा हो चुका होता
आशा में जीता हूँ
दुःख को जीवन का
एक रूप समझता हूँ
इस कारण हँसते
मुस्काराते जी पाता हूँ

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

518-09-12--10-2014
व्यथा,व्यथित,दुःख,जीवन,आशा,निराशा, 

हृदय में प्रेम नहीं हो


हृदय में
प्रेम नहीं हो
मनों में
सामंजस्य नहीं हो
स्वभाव में
धैर्य नहीं हो
सहनशीलता
सोच से पर हो
करवा चौथ हो
तीज त्योंहार हो
व्रत उपवास रखो
पूजा पाठ करो
सब व्यर्थ है
परिणाम
भी निश्चित है

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
516-08-12--10-2014

त्योंहार,व्रत,उपवास,चाँद,प्रेम,पूजा पाठ त्योंहार

चाँद को देख कर क्या करूँ


आकाश के
चाँद को देख कर
क्या करूँ
जब मेरा चाँद
हर पल
मेरा साथ निभाता है
व्रत उपवास रख कर
क्या करूँ
जब मेरा चाँद
अपने हाथों से
मुझे खिलाता है
हाथों में मेहंदी
चेहरे पर श्रृंगार
सुन्दर वस्त्रों का
क्या करूँ
जब मेरा चाँद मुझे
हर रूप में चाहता है
इन त्योहारों का
क्या करूँ
जब मेरा चाँद
केवल मेरे लिए
ही जीता है

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
515-07-12--10-2014

वार,त्योंहार,व्रत,उपवास,चाँद,प्रेम