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शनिवार, 20 सितंबर 2014

महापुरुषों के छोड़े हुए निशान




जीवन पथ पर
महापुरुषों के
छोड़े हुए निशान
दिखते तो नहीं हैं
पर मन में
समाहित हो जाते हैं
जीवन को सुन्दर
बनाने के लिए
प्रेरित भी करते हैं
बार बार याद आते हैं
मनुष्य की नियत
पर निर्भर करता है
जीवन सुन्दर
बनाना चाहता है
या सत्य को
जानते हुए भी
स्वयं को
बरगलाना चाहता है
भ्रम में जीना चाहता है

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
501-41-20--09-2014
जीवन,महापुरुष,निशान,सीख, प्रेरणा

गहरी नींद से जागता है




गहरी नींद से जागता है

सवेरे को उजाले से

नहलाता है

मन में आशाएं जगाता है

अपने ताप से सड़क पर

जमे हुए कोलतार को

पिघलाता है

नंगे पैरों को झुलसाता है

ठंडी हवाओं को

दहकती लू में बदलता है

शाम ढले क्षितिज के

पीछे छुप जाता है

ये सूरज भी

क्या क्या रंग दिखाता है

हर दिन जीवन का
रंग रूप दर्शाता है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
500-40-20--09-2014
जीवन, सूर्य,सूरज

गुरुवार, 18 सितंबर 2014

जीवन सुख दुःख का डेरा




जीवन
सुख दुःख का डेरा
जहां मिले सुख चैन
वहीँ सूर्य का सवेरा
जहाँ मिले आसूं
वही रात का अँधेरा
भाग्य प्रबल
समय हो साथ
उजाला ही उजाला
भाग्य दुर्बल
समय निर्बल
अँधेरा ही अँधेरा
हिम्मत होंसला कर्म
धीरज ढृढ़ निष्चय 
हो अगर मन में
अँधेरा
कम नज़र आता 
उजाले का मार्ग
प्रशस्त हो जाता 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
499-39-18--09-2014
जीना,सुख,दुःख,धैर्य,कर्म,हिम्मत ,होंसला

ख़्वाबों को ख्वाब समझता हूँ




वो मुझे

खुद के अंदर ढूंढती है

मैं उसे

ख़्वाबों में देखता हूँ

वो मुझे

हकीकत में चाहती है

मैं ख़्वाबों को

ख्वाब समझता हूँ

वो लहर है

साहिल की तलाश में

भटकती रहती है

मैं समंदर हूँ

ना जाने

कितने जज़्बातों को

दिल में दबाये रखता हूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
498-38-18--09-2014
शायरी,मोहब्बत,ख्वाब,ज़ज़्बात

बुधवार, 17 सितंबर 2014

मार्ग दर्शन




मन में आया
आज चाय बनाऊं
पत्नी का बोझ कम करूँ
मन में आशा संजोये
पतीली में पानी
फिर दूध डाला
समझ में आया
उतनी देर तक उबाला
ऊपर से चीनी का
तड़का लगाया
पूर्ण विश्वास के साथ
पत्नी से पहले
खुद ने स्वाद लिया
मुंह कैसेला हो गया
सिलसिला चलता रहा
कभी चीनी अधिक तो
कभी दूध तो
कभी पानी अधिक
होता रहा
चाय तो बनी नहीं
थक कर चूर हो गया
दूध चीनी का
नुक्सान तो हुआ
पर एक लाभ भी हुआ
इतना समझ आ गया
किसी काम को
आसान नहीं चाहिए
जो कार्य आता नहीं
करना नहीं चाहिए
फिर भी 
मन नहीं माने तो
किसी जानकार के
मार्ग दर्शन में ही
करना चाहिए
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
497-37-17--09-2014
मार्ग दर्शन