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शनिवार, 6 सितंबर 2014

मेरे ख्याल मेरे नहीं





मेरे ख्याल

मेरे नहीं

तेरे साथ ख़्वाबों में

हुई बातों के

अफ़साने होते हैं

मेरी आँखों में बसे

तेरे हुस्न के

दिलकश

नज़ारे होते हैं

दिल में गूंजती

तेरी आवाज़ के

चर्चे होते हैं

तेरी मासूम

अदाओं के हसीं

बयान होते हैं

मेरे ख्याल

मेरे ही नहीं होते

तुझसे जुड़े होते हैं
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
471-11-06--09-2014  
शायरी,मोहब्बत,ख्याल,ख्वाब,selected

गुणवान




पुष्प तो
गुलाब के ही नहीं
कैक्टस के भी
लुभावने होते हैं
मगर उनमें
गुलाब के
जैसी सुगंध का
गुण नहीं होता
चेहरे की सुंदरता
लम्बे समय तक
याद नहीं रहती
मगर गुणवान
मनुष्य की याद
कभी मिटती नहीं
देश देशान्तर में
उसकी ख्याति
निरंतर लोगों को
प्रेरित करती है

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
470-10-06--09-2014  
मनुष्य,गुण,गुणवान,ख्याति,याद,यादें    

मैं भी मज़बूर हूँ




मैं भी मज़बूर हूँ
"मैं" की डोर से
जो बंधा हूँ
खुद से आगे
बढ़ूँ भी तो कैसे
मैं ही तो सर्वोपरि हूँ
दूसरों से
अधिक ज़रूरी हूँ
मैं हूँ तो सब हैं
मैं नहीं तो कुछ नहीं
मैं भी मज़बूर हूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
469-09-06--09-2014  
मैं,मज़बूर,स्वार्थ,खुदगर्ज़,जीवन

शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

हँस हँस कर बातें तो बहुत करते हैं




हम हँस हँस कर
बातें तो बहुत करते हैं
पीठ पीछे बुराइयां भी
हम ही करते हैं
दोस्त हम ही बनाते हैं
दोस्ती भी हम ही तो
तोड़ते हैं
हम पौधा भी लगाते हैं
फूल आने पर
हम ही तो तोड़ते हैं
कहते किसी से नहीं
पर हम चेहरे पर
चेहरा लगाते हैं
स्वार्थ में जीते हैं 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
468-08-05--09-2014  
स्वार्थ,जीवन,चेहरे पर चेहरा