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शनिवार, 23 अगस्त 2014

कहने को तो



कहने को तो

खूबसूरत चेहरों को

देख कर

दिल की धड़कन 
अब भी

बढ़ने लगती है

पर उम्र की

नजाकत समझ गया हूँ

वक़्त की हकीकत

पहचान गया हूँ

दायरे में बंध गया हूँ

कहाँ रुकना है

जान गया हूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
449-10-23--08-2014
उम्र,दायरा,खूबसूरती,ज़िंदगी,selected

एक शून्य विचरता रहता मन में




एक शून्य 
विचरता रहता 

मन में
एक प्यास बनी रहती 

 हृदय में
कुछ तो कमी जीवन में
पेट भरा 

फिर भी भूख लगती

जहन में
एक आग सी लगती 

 मन के अंदर के मन में
कोई चाहिए
जो समझ सके सुन सके
कम कर दे ताप मन के
पहुंचा सके

ठंडक हृदय को
जड़ कर दे

विचरते शून्य को
स्वछन्द उड़ने दे
खुल कर हँसने दे
भर दे अथाह प्रेम

जीवन गगन में
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
448-09-22--08-2014
जीवन,प्रेम.शून्य,मन,हृदय, selected

कोई तो है




ये जीने का होंसला

कहाँ से आता है

ये गिर गिर कर उठना

कौन सिखाता है

अगर जानता तो

कभी गिरता ही नहीं

ना होंसला हारता कभी

कोई तो है

जो ऊपर से देखता है

सच्चाई और ईमान को

पहचानता है

हर बार घबराने पर

हाथ पकड़ता है

हताश होने पर

गोद मेंउठाता है

निराशा के समय

आशाओं के सूरज

दिखाता है

दुखों पर विजय पाकर

आगे बढ़ने को कहता है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन,ईश्वर,हताश,निराशा,परमात्मा,selected
447-08-22--08-2014

आओ अब खुले आकाश के नीचे रहा जाए




बहुत जी लिए

ऐश-ओ-आराम में

आओ अब

खुले आकाश के

नीचे रहा जाए

बेसहारों के दर्द को

समझा जाए

ठंडी हवा के झोंके

गर्म लू के थपेड़ों से

साक्षात्कार किया जाए

बारिश में भीगने

धूल में सनने का

आनंद लिया जाए

कानों में शोर

पल पल डर का

अहसास किया जाए

जीते जी मौत से

मिला जाए

आओ अब गरीब को 

इंसान समझा जाए 


खुले आकाश के

नीचे रहा जाए 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
446-07-22--08-2014
गरीब,इंसान,बेसहारा,दर्द,selected

जब अकेला होता हूँ




जब 
अकेला होता हूँ
याद आते हैं
वो चेहरे जिनसे
जीवन में
अच्छा या बुरा
कोई ना कोई
सरोकार रहा है
भूल  जाता हूँ
वो चेहरे
जो हर दिन
साथ तो रहते हैं
पर अकेलेपन में
साथ नहीं निभाते
पास रह कर भी
मन से दूर रहते 

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
446-06-22--08-2014
अकेलापन,याद,यादें,selected