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शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

माँ पर कविता- माँ का प्यार क्या होता है



दौड़ते दौड़े फिसल गया था
गिरते ही चोट खा बैठा था
पीड़ा से चिल्ला रहा था
आँखों से अश्रु बहा रहा था 
माँ ने गले से लगाया था
सर पर हाथ फिराया था 
सुबकते सुबकते कहा था
अश्रु बहाना बंद कर
रो कर मुझे दुखी ना कर
तब पहली बार जाना था
माँ का प्यार क्या होता है
संतान की पीड़ा में माँ का 
क्या हाल होता है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

438-49-18--07-2014

माँ,संतान,ममता,

गुरुवार, 17 जुलाई 2014

मनोवेदना


मैं आहत हूँ
स्तब्ध हूँ
व्यथित हूँ
लाचार हूँ
मौन हूँ
इससे अधिक
लिखूं भी तो
क्या लिखूं
मनोवेदना 
समझाने के लिए
क्या इतना ही
पर्याप्त नहीं है

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
437-48-16--07-2014
मनोवेदना  ,आहत ,स्तब्ध,व्यथित,लाचार,मौन,selected

रिश्तों का भ्रम


भ्रम के रिश्ते
या 
रिश्तों का भ्रम
जितना सोचो
उतना उलझता मन
जब तक निभ जाए
तब तक रिश्ता
टूट जाए
तो भ्रम ही भ्रम
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
436-47-16--07-2014

जीवन,भ्रम,रिश्ते,रिश्ता  

बुधवार, 16 जुलाई 2014

आस


आशाएं 
खरी नहीं उतरी
तो भी
मन निराशा नहीं
प्यार देने से
प्यार नहीं मिला
तो भी
कोई शिकायत  नहीं
रिश्तों से 
मोह टूटा नहीं 
कोई तो होगा
जो प्यार के बदले में
प्यार देगा
आस अभी छोड़ी नहीं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
32-369-25-11-2013

आशाएं ,प्यार,जीवन,जीवन मन्त्र,आस

मंगलवार, 15 जुलाई 2014

वाह रे तेरी खुदगर्ज़ी


वाह रे तेरी खुदगर्ज़ी
वाह रे मतलब का गुलाम
कैसी तेरी मानसिकता
कैसा तेरा सोच
कहता कुछ करता कुछ
कैसा तूं इंसान
घर में दीमक लकड़ी खाए
तो जोर जोर से रोये
खुद पेड़  काटे
तो जी भर मुस्कराये
खुद के दुःख तुझे बड़े लगे
औरों के दुःख छोटे
खुद को हँसी खुशी चाहिए
दूजे भले ही रोये
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
435-46-15--07-2014
मतलब ,इंसान,खुदगर्ज़ी,selected 

संभावनाएं


आग बरसाता सूरज
भूख से त्रस्त गिद्ध
शिकार की खोज में
भटक रहा है
किसी छोटे परिंदे की
जान लेने की
संभावनाएं ढूंढ रहा है
नन्हा परिंदा
गिद्ध से बचने के लिए
खुले आकाश में
घबराया हुआ उड़ रहा है
जान बचाने की
संभावनाएं ढूंढ रहा है
नीचे धरती पर
पतला दुबला
रोग ग्रस्त गरीब
पेट की भूख
मिटाने के लिए
तेज़ धूप में
पत्थर तोड़ रहा है
जीने की नयी
संभावनाएं ढूंढ रहा है
एयर कंडीशंड ऑफिस में
भारी भरकम
शरीर का स्वामी
कई बीमारियों को 

झेल रहा है
फिर भी 

धन कमाने की
नयी संभावनाएं 

ढूंढ रहा है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
संभावनाएं, जीवन

237-04--02--05-2014

सोमवार, 14 जुलाई 2014

ज़िन्दगी का आइना टूट कर बिखरने लगा है


ज़िन्दगी से
मोह भंग होने लगा है
ज़िन्दगी का आइना
टूट कर बिखरने लगा है 
हर टुकड़े में 
नया चेहरा 
दिखने लगा है
कोई सुन्दर
प्यार से भरा हुआ
कोई बदसूरत
नफरत से भरा हुआ
कोई हँसता हुआ
कोई रोता हुआ
कोई बेफिक्र जी रहा
कोई चिंता में
घुला जा रहा है
बेचैनी का भाव लिए
चैन की तलाश में
भटक रहा है
मगर फिर भी
इच्छाओं के समुद्र में
गोते लगा रहा है
सब देख कर समझ
आने लगा है
क्यों ज़िन्दगी का 

आइना 
टूट कर बिखरने लगा है
संतुष्ट रहे 
बिना 
आइना साबुत
कैसे रह सकता है

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

434-45-14--07-2014
ज़िंदगी,आइना,इच्छाएं,संतुष्टि,चैन,बेचैनी,

वृद्धावस्था पर कविता --उम्र के जिस मोड़ पर खडा हूँ

थकान बढ़ने लगी
चेहरे पर उम्र दिखने लगी
कब पुत्र से 
पिता फिर दादा बना
पता ही नहीं चला
कुछ पल आये जीवन में
जब रास्ता दुर्गम लगा
सब्र संयम से पार किया
उम्र के 
जिस मोड़ पर खडा हूँ
प्रश्न मुंह खोले सामने खडा है
कह रहा है
अब ताकत कम हो गयी
उम्र बढ़ गयी
कठनाइयों से कैसे लड़ोगे
अवाक रह जाता हूँ
घबराने लगता हूँ
कुछ पल सोचता हूँ
अपने 
आप से ही कहता हूँ
जीवन वृक्ष के
पत्ते पीले अवश्य हो गए
पर गिरे नहीं
जब तक पेड़ में जान है
पहले जैसे ही लहराते रहेंगे
हवा के 
तेज़ झोंके सहते रहेंगे
आसानी से गिरेंगे नहीं
हिम्मत से लड़ते रहेंगे
सब्र से जीते रहेंगे 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

433-44-14--07-2014

उम्र,जीवन,बुढ़ापा,वृद्धावस्था   

Small is no less big


 A drop of tear
From the eyes
Shows the emotions of
A person
A drop of sweat
On the fore head
Reflects the agony of
An individual
A drop of water
Can quench the thirst
Of the thirsty
A drop of blood
Can reveal the
Disease of the
Sick
Though small in size
A drop does things
Bigger than its size
Shows to the world
Small is
No less than big
© Dr.Rajendra Tela,Nirantar
432-43-13--07-2014

Drop,small,big

रविवार, 13 जुलाई 2014

Keeping people happy


It is easier to
Ignite fire
On the peak of
A snow clad mountain
With
Fiery wind blowing
All around
Than keeping
People happy
Who for no
Rhyme or reason
Get angry
At any time
Remain unpredictable
Throughout their lives
Causing misery to
Themselves
And
Others equally
© Dr.Rajendra Tela,Nirantar
431-42-13--07-2014

People,life,misery

She loves me the way I am


She is
The biggest asset
I ever had
She loved me
When I had nothing
She loved me
When I had everything
She loves me
When I have
Stopped earning
She loved me
 The way I was
She loves me
The way I am
Money was always
Secondary to love
For me
For her 
© Dr.Rajendra Tela,Nirantar
430-41-13--07-2014

Love 

कहने को भले ही यादें हो

कहने को
भले ही यादें हो
मन में अब भी ताज़ा हैं
वो लोग वो बातें
हृदय में अब भी जीवंत हैं
वो भूल गए
जग छोड़ गए
उन्हें कैसे भूल सकता हूँ
जिन्होंने आसूं पौछे थे
ख़ुशी के पल दिए थे
कंधे पर हाथ रखा था
होंसला बढ़ाया था
कठिन समय में
साथ निभाया था
उन्हें हृदय से नमन
उन्हें हृदय से नमन
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
429-40-13--07-2014

यादें,जीवन,selected

निपुणता और अहंकार

मैं कविता लेखन की
विधा में निपुण हूँ
एक दिन में तीन कविता
एक कहानी लिखता हूँ
वो कहानी लेखन में
निपुण हैं
एक दिन में तीन कहानी
एक कविता लिखते हैं
स्वयं को
मुझसे श्रेष्ठ बताते हैं
पता नहीं
क्यों इर्ष्या में जीते हैं
निपुणता को मनुष्य की
श्रेष्ठता से जोड़ते हैं
इतना भी नहीं समझते
मनुष्य से
मनुष्य की श्रेष्ठता
सोच,शालीनता,
सद्व्यवहार,चरित्र एवं
सद्कर्मों से होती है
निपुणता ईश्वरीय देन है
अहंकार से घटती है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
428-39-13--07-2014
जीवन,जीवन मन्त्र,निपुणता,अहंकार,श्रेष्ठ,श्रेष्ठता,selected

सामर्थ्य से अधिक


रात के अँधेरे को
उजाले से ढकने का
प्रयास करता रहा
दिन के उजाले में
बढ़ते अँधेरे से
बेखबर जीता रहा
ना रात का अँधेरा
कम कर पाया
ना दिन को अँधेरे से
बचा पाया
सामर्थ्य से अधिक
करने का प्रयास तो 
निष्फल रहा ही 
चैन से भी
हाथ धोना पडा
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
427-38-13--07-2014

सामर्थ्य ,सामर्थ्य से अधिक, जीवन,जीवन मन्त्र,