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शनिवार, 12 जुलाई 2014

कर्म फल


वन उपवन में
चांदी सा चमकते
चमेली के फूल को देखा
काँटों की बीच 
मन लुभावन
गुलाब को देखा
हर सिंगार के
नन्हे फूल को सुगंध
फैलाते देखा
अंगूठी में जड़े नगीने सा
मोगरे के फूल को देखा
महुआ के फूल को
मदमस्त महक से
बहकते देखा
सब की कद काठी
रंग रूप
पौधे अलग अलग
सबके सब महक के
गुण से भरे हुए
सोचा तो
मन में विचार आया
इन्हें अवश्य कर्मों का
फल मिला होगा
तभी सब फूल
महक से भरे हुए हैं
ऐसे फूल भी
संसार में बहुत हैं
जो जीवन में
कभी नहीं महकते
उन के
कर्म ही ऐसे रहे होंगे
महक के गुण से
सदा वंचित रहते
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
426-37-12--07-2014

कर्म, गुण, जीवन,जीवन मन्त्र,प्रकृति, महक,selected

गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में-जिससे भी ज्ञान प्राप्त हो उसे ही गुरु मान लो भाई

(गुरु पूर्णिमा  के उपलक्ष्य में)
जिससे भी ज्ञान प्राप्त हो उसे ही गुरु मान लो भाई
ना चेहरा
ना आकार
ना भाषा
ना परिभाषा
ना आयु
ना अनुभव
ना शिक्षा
गुरु का
प्रमाणित
रूप नहीं कोई
जिससे भी
ज्ञान प्राप्त हो
उसे ही गुरु
मान लो भाई

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

425-36-12--07-2014

गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर ,गुरु पर कविता -गुरु से सीखा गुरु से जाना


(गुरु पूर्णिमा  के उपलक्ष्य पर )
गुरु पर कविता
गुरु से सीखा
गुरु से जाना
गुरु ने समझाया
गुरु ने बताया
ज्ञान रखने से नहीं
बांटने से बढ़ता है
सार्थक ज्ञान ही
जीवन आधार है
ज्ञान का दुरूपयोग
अक्षम्य अपराध है
जो बांटा नहीं
वह अज्ञान है
उपयोग नहीं किया
तो अत्याचार है
ज्ञान का प्रसार ही
गुरु का सम्मान है

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

424-35-12--07-2014
गुरु,ज्ञान,गुरु पूर्णिमा ,शिष्य

शुक्रवार, 11 जुलाई 2014

Let god do what he wants to


Hearing
Voices of
No No No
From all the
Directions
All the corners
Dreams 
Started drying
Desires
 Started melting
Ambitions
Started dying
Hope
Started drowning
Life became
Miserable
Till I realized
Only hard work
Positive attitude
And
Patience
 Is in my hand
To give
When to give
Rests with
The power above
Let me do
What
 I am supposed to
Let god do
What he wants to
Fulfill my desires
When he wishes to
© Dr.Rajendra Tela,Nirantar
423-34-11--07-2014
Attitude,Patience,desires,

ambitions,dreams,life,karma,god

Dark tunnel of depression


Depression
Is an 
Endless
Dark tunnel
Without light
Without air
The deeper
You go inside
More difficult 
It becomes
To survive
Life looks 
No less than hell 
Slowly becomes
Impossible
To return
Back to light
Breathe fresh air
One must get out of 
The tunnel 
As early as 
one can 
Before getting 
Entrapped 
Losing smile
And 
Happiness 
For ever
© Dr.Rajendra Tela,Nirantar

422-33-11--07-2014

Depression,life,smile,tunnel,

शक की अग्नि


शक की अग्नि
विध्वंशक होती 
लग जाए एक बार
द्वेष के विष को
जन्म देती है
चाल चरित्र
सच्चाई पर
वार करती है
जीवन को बेचैन
संबंधों को जला कर
ख़ाक करती है
गेहूं के साथ
घुन को भी पीसती है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
421-32-11--07-2014

शक,जीवन,बेचैन,सम्बन्ध,विध्वंशक 

गुरुवार, 10 जुलाई 2014

दिल अगर यूँ ही सताता रहेगा


दिल अगर
यूँ ही सताता रहेगा
ना ज़िंदगी का पता
ना ठिकाना होगा
मुसाफिर बन कर
भटकता रहूँगा
राख के ढेर में
चिंगारी ढूंढता रहूँगा
एक दिन खुद राख बन
दुनिया में उड़ता रहूँगा
मोहब्बत की तलाश में
सुकून पर कालिख
मलता रहूँगा
तन्हाई में जीता रहूंगा
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
420-31-10--07-2014

दिल,सुकून,मोहब्बत,तन्हाई,शायरी,selected

गिरगिट

गिरगिट 
मुझे गिरगिट
बहुत अच्छे लगते हैं
चेहरे पर चेहरा चढ़ाए
लोगों से लाख गुना
बेहतर होते हैं
कोई लाग लपेट नहीं
कोई सच झूठ का
चक्कर नहीं
जैसे हैं
वैसा ही दिखते भी हैं
वैसा ही करते भी हैं
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
419-30-10--07-2014

गिरगिट, चेहरे पर चेहरा, लाग लपेट, सच झूठ

दुखों का ढिंढोरा


कभी सूखे तालाब
कटे वृक्ष का दुःख देखो
फुटपाथ पर पड़े
भिखारी का
भीख मांगते बच्चे का
दुःख देखो
किसी अंधे मूक
बघिर की पीड़ा पूछो
सदा खुद के दुःख का
रोना रोते हो
छोटे से दुःख में
हाहाकार मचाते हो
मानसिक संतुलन खोते हो
खुद की संवेदनाओं को
सर्वोपरि
दूसरों की भावनाओं को
नगण्य मानते हो
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
418-29-10--07-2014

दुःख,भावनाएं,जीवन,मूक,बघिर,गरीब,संवेदना,

बुधवार, 9 जुलाई 2014

हँसते चेहरे का दुःख


क्यों समझते हो
हँसते चेहरे को
कोई दुःख नहीं होता
होंसला बढ़ाने वाले का
होंसला कभी नहीं टूटता
जानना है तो
मेरे हृदय से पूछो
कैसे दुःख दबा कर
रखता है
मेरे मन से जानो
कैसे दर्द सहता है
मेरे तकिये से पूछो
आँखों की नमी
कैसे सहता है
मेरी चादर से पूछो
चेहरे की मायूसी
कैसे छुपाती है
मेरे बिस्तर से पूछो
कैसे रात भर
करवटें बदलता हूँ
मेरे आईने से पूछो
मेरा दर्द भरा चेहरा
कैसे बर्दाश्त करता है
क्यों समझते हो
हँसते चेहरे को
कोई दुःख नहीं होता
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
दुःख,सुख,जीवन,दर्द,

417-28-09--07-2014

बचपन पर कविता- उन्मुक्त बचपन


बचपन पर कविता- उन्मुक्त बचपन
=========
उन्मुक्त बचपन
के उन्मुक्त दिन
ना प्यास की चिंता
ना भोजन का ध्यान
ना माया मोह का लोभ
ना जाती धर्म का ज्ञान
ना कर्म की बेड़ियां
ना कर्तव्य का भान
ना लक्ष्य का पता
ना समय का बंधन
ना उचित
अनुचित का सोच
ना उंच नीच का भाव
ना सम्मान का ख्याल
बचपन का
अपना अलग संसार
खेलना कूदना
आमोद प्रमोद
उसके जीवन का सार
उन्मुक्त बचपन
के उन्मुक्त दिन
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
416-27-09--07-2014

उन्मुक्त, बचपन
बचपन पर कविता

मंगलवार, 8 जुलाई 2014

अगाध प्रेम


चंद्रमा से
मिलन असंभव है
जानते हुए भी
चंद्रमा के प्रेम में
भाव विव्हल चकोर
दिन भर मन में
मिलन की
आशाएं संजोये
धैर्य से सांझ ढले तक
चन्द्र दर्शन की
प्रतीक्षा करता है
चंद्रोदय होते ही
प्रफुल्लित हो
नाचने लगता है 
चांदनी में नहा कर ही
संतुष्ट हो जाता है 
चन्द्रमा से अपने
निस्वार्थ प्रेम का
परिचय ही नहीं
जगत को
अगाध प्रेम का
अर्थ भी समझाता है 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
415-26-08--07-2014

प्रेम,चाँद,चांदनी,चकोर,चंद्रोदय,निस्वार्थ ,अगाध

Marriage

Marriage
Is not union of
Two bodies
Two people
Two families
It is a symbol of
Everlasting
Mutual love
A bond of faith
A bridge of relations
Unequivocal trust
Between
Two persons
To enjoy
The fragrance of
Life together
With hope 
And
Commitment
Towards each other
© Dr.Rajendra Tela,Nirantar
414-25-08--07-2014

Marriage,trust,love,faith,relations,life

One who feels I am always right


One who feels
I am always right
Is obsessed
Eccentric
And
Out of mind
It’s the beginning of
Destruction of attitude
And
Human mind
Most of the times
Bound to be defeated
In the battle of life
Remain dissatisfied
Till the end of
One’s life
©Dr.Rajendra Tela,Nirantar
413-24-08--07-2014
Pride,life,poem on pride

Ego


Ego has 
No beginning
No end
No apology
No remorse 
No face
No depth
No height
Its false belief
Murder of
Compassion
Behavior
Positive thoughts 
A revolt against
God’s principles 
Leads to 
Unceremonious
 Death of 
Human relations
©Dr.Rajendra Tela,Nirantar 
412-23-08--07-2014
Ego,life

मन से पूछा क्या चाहता है


मन से पूछा
क्या चाहता है
मन भेष बदलता रहा
कभी कुछ
कभी कुछ कहता रहा
निरंतर
भ्रम में रखता रहा
हृदय से पूछा
क्या चाहता है
हृदय कभी रोता रहा
कभी हँसता रहा
निरंतर
पहेलियाँ बुझाता रहा
आत्मा से पूछा
मुझसे क्या आशा है
आत्मा ने कहा
इच्छाओं से 
नाता तोड़ लो 
संतुष्ट रहो
संतुष्ट रखो
बस इतनी सी चाह है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
411-22-08--07-2014

आत्मा,हृदय,चाह,इच्छा,मन,जीवन ,जीवन मन्त्र, selected   

सोमवार, 7 जुलाई 2014

सुख पाना हो


सुख पाना हो
चैन से रहना हो
ख़ुशी से जीना हो तो
ना किसी से होड़ करो
ना किसी को
हराने की सोचो
ना क्रोध करो
ना वाद विवाद में उलझो
ना किसी की हँसी उड़ाओ
ना पीठ पीछे बात करो
न किसी को
छोटा बड़ा समझो
सबसे समान व्यवहार करो
न निराश हो ना हताश हो
जो मिला है ईश्वर से
उसमें संतुष्ट रहो  
भाग्य पर भरोसा मत करो
लक्ष्य को याद करते रहो
कर्म पथ पर चलते रहो

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
410-21-07--07-2014

होड़ ,सुख,चैन,ख़ुशी,जीवन,जीवन मन्त्र, कर्म, लक्ष्य, भाग्य,selected 

समय के साथ


बर्फ पिघलने के
बाद भी
कुछ समय तक
उसकी ठंडक बनी रहती
सूरज ढलने के बाद भी
कुछ समय तक
उसकी गर्मी बनी रहती
समय के साथ
स्थिति बदल जाती
मनुष्य के जाने के बाद
कुछ समय तक
उसकी यादें ज्वलंत रहती
समय के साथ मंद
पड़ जाती
कभी कभास चर्चा होती
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
409-20-07--07-2014

जीवन,यादें,व्यक्ति,selected

रविवार, 6 जुलाई 2014

शौक से सहता हूँ


कागज़
का टुकडा नहीं हूँ
लिख कर फाड़ दिया
धडकते दिल का
मालिक हूँ
हसरतें रखता हूँ
निरंतर
मोहब्बत को
तरसता हूँ
मोहब्बत में जीता हूँ
जिसका हो गया
एक बार
उसी का रहता हूँ
पुचकारे ये दुत्कारे
ना शिकवा
ना शिकायत
शौक से सहता हूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
408-19-05--07-2014

शायरी,मोहब्बत,कागज़,प्यार,प्रेम,selected

दुश्मन ही बहुत हैं फ़िक्र में जीने के लिए


दुश्मन ही बहुत हैं
फ़िक्र में जीने

दिन रात 
कोसने के लिए
रातों को 
जागने 
हर लम्हा याद कर
बद्दुआ देने 
के लिए
वक़्त बर्बाद
करने के लिए
मैं क्यूं फ़िक्र करूँ
वक़्त बर्बाद करूँ
क्यूं ना खुदा का
नाम लेता रहूँ
इंसान हूँ
इंसान के लिए
दुआ करता रहूँ 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
407-18-05--07-2014

बद्दुआ, फ़िक्र, दुआ, शायरी,selected

पुराने यार याद आए


पुराने यार याद आए
यादों के रीते घोंसले
फिर से बस गए
जहन में
हँसी ठहाके गूंजने लगे
कानों में लफ्ज़
सुनायी पड़ने लगे
दिल में राहत के
बादल बरसने लगे
टूटे हुए धागे जुड़ने लगे
रोते ख्याल मुस्कराने लगे
खुशनुमा दिन
वापस आने लगे
जो ज़िंदा नहीं
लौटने लगे
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
406-17-05--07-2014

यार,दोस्त,यादें,याद,