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शनिवार, 14 जून 2014

कबीर बोले


कबीर बोले
========
स्वप्न लोक में
विचरण करते करते
दर्शन हुए कबीर के
शीश नवा कर पूछ लिया
कितना सहने के उपरान्त 

जीवन सत्य जाना आपने
उत्तर में कबीर बोले
आवश्यक नहीं
स्वयं सह कर ही
जीवन समझे कोई
मन संवेदनशील 

हृदय में प्रभु बसे हो 
दूसरों के कष्ट को 
अपना समझ कर 

जीवन दर्शन
समझ सकते हो 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
कबीर,जीवन,जीवन दर्शन

337-35-14--06-2014

दर्द की मार


दर्द की मार वही समझते हैं जिन्होंने गम देखे हैं
सब्र की बात वही करते हैं जिन्होंने गम देखे नहीं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

336-34-14--06-2014
दर्द,गम,सब्र

हाँ में हाँ नहीं मिलाना

लोगों को
नाराज़ करना
आसान होता है
बस हाँ में हाँ नहीं
मिलाना होता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
335-33-14--06-2014

लोग,नाराज़,हाँ में हाँ मिलाना

रिश्ते थे ही कहाँ


रिश्ते थे ही कहाँ
जिन्हें टूटना था
रिश्तों के नाम पर
अहम की लड़ाई थी
स्वार्थ का इम्तहान था
लेने देने का धंधा था
दांव पेंच का खेल था
एक को जीतना
दूसरे को हारना था
रिश्ते थे ही कहाँ
जिन्हें टूटना था
रिश्तों का तो
केवल बहाना था
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
334-32-14--06-2014
रिश्ता,रिश्ते,सम्बन्ध

रिश्तों पर कविता

किस्मत के हादसे


किस्मत के हादसे
कैसे बताएं
किस किस ने मारी ठोकरें
कैसे सुनाएं
मोहब्बत के गीत गाये थे
अब मातमी धुन
कैसे बजायें
दिल में उठते हैं
यादों के तूफां
सुकून की किश्ती को
किनारे कैसे लगायें
हसरतों की कब्र
खुदती रही
उन्हें दफ़न होने से
कैसे बचाएं
तकदीर ही कुछ ऐसी थी
अब अश्क क्यूं बहायें
अब खामोशी में ही
सुकून है
हाल-ऐ-दिल क्यूं बताएं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
किस्मत,हादसे,हाल-ऐ-दिल,मोहब्बत,यादें,शायरी

333-31-14--06-2014

शुक्रवार, 13 जून 2014

कौन खुदा को पूछता


किसी के चमन में बहार
किसी के चमन में खिज़ा
किसी चेहरे पर हँसी क्यों है
किसी चेहरे पर मायूसी क्यों है
ना जवाब मिला किसी को
ना जवाब मिलेगा किसी को
जवाब मिल जाता तो
कौन उम्मीद रखता
कौन पूछता खुदा को 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
सुख ,दुःख,गम,शायरी,उम्मीद,खुदा,ज़िंदगी
332-30-13--06-2014


कल का दिन बहुत अच्छा गुजरा


कल का दिन
बहुत अच्छा गुजरा
सुबह अखबार नहीं आया
ह्त्या बलात्कार
दुर्घटना भ्रष्टाचार की
खबरें पढने से बच गया
बिजली विभाग के
कर्मचारियों की
हड़ताल हो गयी
लैपटॉप सो गया
टी वी केबल भी
खामोश हो गया
सनसनी खेज़ खबरें
सास बहु के
घिसे पिटे सीरिअल
देखने से बच गया
मोबाइल पानी में गिर गया
मौत की गोद में सो गया
ना किसी का फ़ोन आया
ना किसी को कर सका
फेस बुक व्हाट्स ऍप के
मोह से बच गया
नितांत अकेला रहा गया 
पूरा दिन खुद से ही
बातें करता रहा
जिन्हें भूल गया था
उन्हें याद करता रहा
कल का दिन
बहुत अच्छा गुजरा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
सामयिक,कल,आज,जीवन, फेस बुक व्हाट्स ऍप, ,हास्य,व्यंग्य

331-29-13--06-2014

मंजिल ना मिल सकी हमको


चाहतों की हद से
गुजर जाने के बाद भी
मंजिल 
ना मिल सकी हमको
गम में
एक आंसू भी ना 
बहा सके
उनकी मजबूरियां 
समझते थे
बड़े नर्म दिल के 
मालिक थे
कैसे हमारे रकीब को
घर से बेघर करते
हमें हँसा कर 
उसे रुलाते
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
चाहत,मंज़िल,मोहब्बत,शायरी,रकीब

330-28-13--06-2014

हास्य-व्यंग्य -कल एक अनर्थ हो गया

 हास्य-व्यंग्य -कल एक अनर्थ हो गया 
=============
कल एक अनर्थ हो गया
पालतू कुत्ते से पूछ लिया
कभी धोखा तो नहीं दोगे
वादा करो
भूले से भी नहीं काटोगे
कुत्ता पहले गुर्राया
फिर दुम हिलाते हुए बोला
मैं आप के नेताओं
जैसा नहीं हूँ
जिस थाली में खाता हूँ
उसमें छेद नहीं करता
पाल पोस कर बड़ा करने
वाले को धोखा नहीं देता हूँ
ईमानदारी का केवल
ढोल नहीं पीटता हूँ
चिकनी चुपड़ी बातों से
बहलाता नहीं हूँ
मालिक के लिए
जान तक दे सकता हूँ
पूरी ज़िम्मेदारी से
कर्तव्य निभाता हूँ
मैदान छोड़ कर
भागता नहीं हूँ
अपना घर छोड़ कर
दूसरों के घर में
गुर्राता नहीं हूँ 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
हास्य व्यंग्य, कुत्ता,नेता .जीवन,

329-27-13--06-2014

गुरुवार, 12 जून 2014

वही लम्हे


पहले
मांग कर लिए थे
आज बिन मांगे
वही लम्हे मिले
आंसू सूखे भी नहीं थे
फिर बह निकले
बेवफाई के अफ़साने
रुखसत लेने लगे थे
यादों के मंज़र धुंधले
होने लगे थे
वो नज़र आ गए
देख कर मुस्काराए
फिर आगे निकल गए
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
शायरी,मोहब्बत,लम्हे,बेवफाई

328-2-12--06-2014

अपेक्षाओं के बादल


अपेक्षाओं के बादल
बड़े चालाक होते हैं
चेहरे पर चेहरा 
चढ़ा कर रखते हैं
आशाओं के भ्रम में
जीने वालों को
बरसने की 
आशा तो देते हैं
मगर बरसते नहीं हैं
खुशी के स्थान पर
निराशा को जन्म देते हैं
आत्म बल घटाते हैं
रिश्तों से 
विश्वास उठाते हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
अपेक्षा,आशा,जीवन, भ्रम

327-25-12--06-2014

बुधवार, 11 जून 2014

हर घटना की पीछे कोई बात होती है


हर घटना की पीछे
कोई बात होती है
हर बात के पीछे
कुछ तथ्य होते हैं
हर तथ्य के पीछे
सत्य छुपा होता है
अंत में भले ही
सत्य जीत जाए
झूठ फरेब में डूबे
आज के ज़माने में
सदा सच ही जीतेगा
आवश्यक नहीं होता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन,सच,झूठ घटना,बात,तथ्य
327-24-11--06-2014


उम्र और अनुभव को थोपना छोड़ दो


फैसला आज नहीं
कल करूंगा
एक बार नहीं दो बार
सोच कर करूंगा
मैंने किया तो उचित 
तुमने किया तो
अनुचित
तुम मुझसे छोटे हो
पढ़े लिखे भी कम हो
अनुभव में आधे हो
तुम कैसे उचित कर
सकते हो
इस सोच में डूबे
बुजुर्गों से नम्र निवेदन है
सत्य को पहचान लो
समय से 

कदम मिला लो
उम्र और अनुभव को
थोपना छोड़ दो
उचित को उचित
अनुचित को अनुचित
कहना प्रारम्भ कर दो

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
उचित,अनुचित,उम्र,अनुभव,जीवन,

326-23-11--06-2014

मंगलवार, 10 जून 2014

काला सफ़ेद नहीं हो सकता


काले को
सफ़ेद कहने से
काला सफ़ेद नहीं
हो सकता
सच सदा सच ही
रहता है
ना जाने मनुष्य
छोटी सी बात को
समझते हुए भी
नहीं समझता
स्वार्थवश झूठ का 
सहारा लेता है
किसी और को नहीं
स्वयं को धोखा देता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

सच.झूठ,स्वार्थ,जीवन
325-22-10--06-2014

भीड़ से आक्रान्त


कभी भीड़ से
आक्रान्त हो
मन एकाकीपन
चाहता
कभी एकाकीपन
काटने को दौड़ता
मन चेहरों के
बीच रहना चाहता
सोच में
सामंजस्य नहीं हो
तो मन निरंतर
भटकता रहता
चैन की खोज में
व्यथित जीता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
भीड़,आक्रान्त ,सामंजस्य,चैन,जीवन,जीवन मन्त्र

324-21--09--06-2014

सोमवार, 9 जून 2014

कब तक सब्र करूँ


जब परेशाँ होता हूँ
सोचने लगता हूँ
सब्र की भी हद होती है
कब तक सब्र करूँ
किस्मत पर तोहमत
लगाने लगता हूँ
ठन्डे दिमाग से सोचता हूँ
मन में ख्याल आता है
सब्र की तो
ज़रुरत ही तब पड़ती है
जब हालात ठीक नहीं होते
फिर क्यों मैं
उस वक़्त सब्र खोता हूँ
जब हालात से
मुकाबले के लिए
सब्र रखना
सबसे ज़रूरी होता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
सब्र,जीवन,जीवन मन्त्र

323-20--09--06-2014

किसी ने नहीं सिखाया


बचपन से युवा बनने तक
किसी ने नहीं सिखाया 
अपनी कमियां उजागर करूँ
सदा यही समझाया गया
कमियों को छुपा कर रखूँ
झूठ का आवरण ओढूँ
कोई पूछे तो मुस्कराकर कहूँ
उनके जितना ही सक्षम हूँ
उम्र और अनुभव के
उपरान्त अब सोचता हूँ
अगर बाल्यकाल  से ही
हिम्मत कर के,
हीन भावना से मुक्त हो कर
अपनी कमियों के बारे में
अनुभवी लोगों से अग्रजों से
गुरूओं से,निपुण लोगों से
समय समय पर चर्चा करता
उनका मार्ग दर्शन लेता
जिनके कारण
जीवन भर कुंठित रहा
उन कमियों को
दूर कर सकता था
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
कमियां,अनुभव,जीवन,सीख,मार्ग दर्शन  

322-19--09--06-2014

रविवार, 8 जून 2014

आडम्बर के कपडे

आडम्बर के कपडे
लोग तीज
त्योंहार मनाते हैं 
व्रत उपवास रखते हैं 
मंदिर मस्जिद जाते हैं 
पैबंद लेगे कर्मों को
आडम्बर के
कपड़ों से छुपाते हैं 
धर्म का 
मखौल उड़ाते हैं 
भ्रम में जीते हैं  
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
321-18--08--06-2014

आडम्बर,तीज, त्योंहार,

जन्म दिवस पर


जेठ का महीना
कल जैसा ही
आज का दिन
उतनी ही तपन
उतनी ही चुभन
एक अंतर
आज के दिन से
ओर दिनों को
विशिष्ट बनाता है
ढेर सारी शुभ कामनाएं
ढेर सारा स्नेह
जो वर्ष भर में
नहीं मिलता
मुझे आज के दिन 

मिल जाता है
गर्म  वातावरण को 
ठंडक प्रदान करता है
प्यार के संबंधों को
सुढ़ृड बनाता है
हृदय को भाव विव्हल
मन में नव आशाओं का
संचार करता है

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जन्म दिवस,जन्म दिन,स्नेह,प्यार,सम्बन्ध,

320-17--08--06-2014