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शनिवार, 10 मई 2014

Light In Darkness


I asked the sun
I asked the moon
Why do you
 Hide your self
In darkness
Half the time
Both gave the
Same reply
Nobody can
Always
Live in lime light
So we practice
To live half time
In darkness
Half time in light
If ever
We have to live in
In total darkness
We shall 
Neither be perturbed
Nor feel bad
As by then
We will be used to
Any form of life
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
254-21--10--05-2014

Life,light,darkness,fear,perturbed 

स्वार्थ से जीना


वृक्ष के पत्तों ने
सूरज से प्रश्न किया
क्यों रात में
गुम हो जाते हो
स्वयं को संसार से छुपाकर 
पीछे अन्धेरा छोड़ जाते हो
सूरज बोला प्यारे पत्तों
मुझे भी विश्राम चाहिए
अगर रात में भी 
उजाला और ताप बरसाऊंगा
क्या थक नहीं जाऊंगा
अगले दिन 
कैसे तन्मयता से
कर्तव्य निभाऊंगा
तुम्हें भी आवश्यकता से
अधिक ताप मिलेगा
तो तुम भी झुलस जाओगे
समय से पहले ही
संसार से विदा हो जाओगे
स्वार्थ से जीना 
वैसे भी सार्थक नहीं होता 
सुखद जीवन के लिए
दूसरों के लिया भी
सोचना पड़ता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
स्वार्थ,जीवन,आराम,विश्राम

253-20--10--05-2014

शुक्रवार, 9 मई 2014

आस तो अपनों से भी थी


आस 
अपनों से भी थी
आस 
परायों से भी थी
अगर आस
पूरी नहीं हुयी
कैसे किसी को
गुनाहगार बताऊँ
शायद मैं ही
किसी की आस पर
खरा नहीं उतरा
फिर कैसे किसी से
उम्मीद करूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
252-19--09--05-2014

आस,आशा,उम्मीद,जीवन

गुरुवार, 8 मई 2014

यादों का खज़ाना


हर मन में
एक तहखाना
हर तहखाने में
यादों का खज़ाना
कुछ बुरा
कुछ अच्छा
कुछ अनमोल
कुछ बेकार
जब भी मन का
दरवाज़ा खोलो
खज़ाना टटोलो
कभी हँस लो
कभी आँखें
नम कर लो
थक जाओ तो
दरवाज़ा बंद कर दो
कल को भूलो
आज में जी लो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
यादें,याद,जीवन,

250-17--08--05-2014

Life takes the path it likes


Left and right
Up and down
Every now and then
Life changes
Colors
From black to white
Whether one smiles
Or one cries
Life doesn’t understand
Any feelings
Takes the path
It likes
Lucky are people
Who smile?
More than they cry
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
Life

249-16--08--05-2014

Taking everybody for granted


Past midnight
I asked my wife
To cook
My favorite dish
She refused
I asked my friend
To accept
All that I said
He refused
I asked my son
To do everything
I wished
He refused
I asked my parents
To treat me
Like a small child
Even after
I became an adult
They refused
I kept getting
Refusal after refusal
Looked to me
As a sort of betrayal
It was too late
Before I realized
I had spoiled relations
I was taking
Everybody for granted
Thinking only about me
Without caring
About  
Their feelings
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
Life,taking every body for granted,expectations

248-15--08--05-2014

बुधवार, 7 मई 2014

होड़ कतई नहीं


होड़ कतई नहीं
चेहरे पर शिकन नहीं
तानों की परवाह नहीं
प्रशंसा सम्मान की 
चाहत नहीं
लोगों के
हृदय में स्थान
बना सकूँ
धैर्य से जी सकूँ
संतुष्ट रह सकूँ
चैन की नींद सो सकूँ
दौड़ में पीछे ही सही
हार में भी
हार नहीं कहलाएगी 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
होड़,स्वार्थ,हार,जीत,संतुष्टि,धैर्य ,जीवन ,जीवन मन्त्र

247-14--07--05-2014

वेदना


वेदना का
ना स्वर होता
ना चेहरा
ना ही देह होती
ह्रदय में
तीव्र रक्त संचार
व्याकुल मन 
शुष्क कंठ
आँखों में नमी
विचार
निराशा के
चक्रव्यूह से बाहर
निकलने को आतुर
असहाय पंछी से
फडफडाते
ना चाहते हुए भी
मन की वेदना को
उजागर करते
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
246-13--07--05-2014

वेदना, जीवन

मंगलवार, 6 मई 2014

काल करे सो आज कर


रात सोया
सुबह उठा ही नहीं
हृदय गदगद
मन खुश था
बिना कष्ट पाये
जीवन मुक्त हो गया
आकाश से नीचे
पृथ्वी पर झांका
घर में
हाहाकार मचा था
हर अपना
नीर बहा रहा था 
मन ही मन
मुझे कोस रहा था
क्यों सब कुछ आधा
अधूरा छोड़ गया था
ना किसी कागज़ पर
कुछ लिख गया था
ना हिसाब किताब
समेट कर गया  था
रूपये पैसे का
लेखा जोखा ना था
किससे लेना किसको देना
किसी को पता ना था
स्थिति देख कर मन
ग्लानि से भर गया
मुझसे ही पूछने लगा
क्यों मैंने ईश्वर से
ऐसे मौत ही चाही थी
स्वयं सुख में
दूसरों के लिए कष्टों की
फसल उगाई थी
काल करे सो आज कर,
आज करे सो अब
पल में प्रलय होएगी,
बहुरि करेगा कब
कबीर की सीख
हवा में उड़ाई थी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
कबीर, सीख, जीवन,मृत्यु,जीवन मन्त्र

245-12--06--05-2014

बचपन से बुढापे तक


जब भी शहर के
पुराने पुल से गुजरता हूँ
लगता है
बचपन से बुढापे तक की
यात्रा कर रहा हूँ
पुल की जगह जगह से
टूटी रेलिंग
पैबंद लगी सड़क में
मुझे मेरा आज दिखने
लगता है
चेहरे पर बुढापे का दर्द
झलकने लगता है
दीवारों पर लगे
नयी पुरानी फिल्मों के
रंग बिरंगे पोस्टर
मुझे मेरे बचपन की
याद दिलाते हैं
मन में जिज्ञासा जगाते हैं
रात को चमकती हुयी
मरकरी लाइटें
मुझे अपनी जवानी के
मस्त दिनों में लौटाती हैं
मुझे किसी मशहूर गीत की
पंक्तियाँ गुनगाने को
मजबूर करती हैं
जब भी शहर के
पुराने पुल से गुजरता हूँ
लगता है
बचपन से बुढापे तक की
यात्रा कर रहा हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
बचपन,बुढ़ापा,जीवन

244-11--06--05-2014

सोमवार, 5 मई 2014

अहम् से भरा हूँ


कह तो दिया
और कैसे कहूं
समझ नहीं आया
तो मैं क्या करूँ
समझना नहीं चाहते तो
कैसे समझाऊँ
मेरे समझाने में 
कमी थी
कभी नहीं मानूंगा
अहम् से भरा हूँ
धैर्य से परे हूँ
हर गलती तुम्हारी थी
सदा कहता रहा हूँ
आगे भी कहता रहूँगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
अहम,घमंड,धैर्य,जीवन ,जीवन मन्त्र

243-10--05--05-2014

हर पटाखे के साथ मैं भी जलता हूँ


दीपावली पर
हर पटाखे के साथ
मैं भी जलता हूँ
हर दिए के साथ
मैं भी सुलगता हूँ
इतनी बार जलता
सुलगता हूँ
दर्द से फट जाता हूँ
बिलख बिलख कर
रोता हूँ
जब गरीब के पास
खाने को रोटी नहीं
सर पर छत नहीं
पीने को 
स्वच्छ पानी नहीं
तन ढकने को वस्त्र नहीं
नारी सुरक्षित नहीं
बच्चों को शिक्षा नहीं
बुजुर्गों को सम्मान नहीं
संबंधों में विश्वास नहीं
सिवाय रोने के
क्या कर सकता हूँ
दीपावली पर खुशी
कैसे मना सकता हूँ

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
दीपावली, खुशी,गरीब,त्योंहार
242-09--05--05-2014


रविवार, 4 मई 2014

कभी कभी


कभी कभी
हृदय को व्यथित
मन को क्रोधित
करना पड़ता है
भावनाओं को
नियंत्रित
करना पड़ता है
ना चाहते हुए भी
ना कहना पड़ता है

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
भावनाएं,जीवन,कभी कभी

241-08--05--05-2014

उथला सोच

मनुष्य का
सोच ही नहीं
नदी समुद्र,सागर 
सब उथले हो गए
गंदे नाले और गंगा में
भेद समाप्त हो गया
पहाड़ों की ऊंचाई तो
कम नहीं हुई पर 
पर्यावरण पर 
निरंतर अत्याचार से
वातावरण की
स्वच्छता कम हो गयी
आकाश का विस्तार तो
कम नहीं हुआ
पर अतिक्रमण से त्रस्त
पक्षियों के लिए
असुरक्षित हो गया
मनुष्य के
उथले सोच से 
धरती जल नभ
सब उथले हो गए
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
पर्यावरण,प्रकृति,जल,नभ,थल,
240-07--05--05-201

Repentance


Many a times
My past haunts me
Memory of
My deeds
My thoughts
My behavior
The words I spoke
Pains me
There is no way
To undo
What I did
The only thing
At my command
Is to
Repent my sins
Forgive and forget
Not to repeat
My unworthy actions
Pray for the welfare of
Each and every person
Try to unwind
Spoilt relations
Live like a true human
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
239-06--04--05-2014
Sins,deeds,life,repentance ,past,