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शनिवार, 19 अप्रैल 2014

लोग आते रहे लोग जाते रहे


ज़िंदगी में
लोग आते रहे
लोग जाते रहे
रिश्ते बनते रहे
रिश्ते टूटते रहे
याद वही रहे
जो हँसते रहे हँसाते रहे
रोते रहे रुलाते रहे
सदा साथ निभाते रहे
तय खुद को ही
करना पड़ता है
लोग को 
कैसे याद रखें
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
208-51--19--04-2014

ज़िंदगी, रिश्ते, याद

अगर अहम में जीते रहोगे


हर बार तुम ही सही होते हो
यह सत्य नहीं अहम का रोग है
अतिशीघ्र इसे से मुक्त हो जाओ
दूसरे भी सही हो सकते हैं
बात को मस्तिष्क में बिठाओ
जिसने भी सोचा ऐसा अब तक
जीवन में मुंह की खाई उसने
याद रखो तुम अपवाद नहीं हो
एक दिन तुम भी पछताओगे
अगर अहम में जीते रहोगे
अपना सोच नहीं बदलोगे
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
अहम,सोच.जीवन,जीवन मन्त्र,
207-50--19--04-2014

Accept me Or Reject me


I am nobody,s
I am everybody,s
Since
I like being truthful
It depends on people
Who know me
How they take me
Accept me
Or
Reject me
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
206-49--19--04-2014

Life,accept,reject 

शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

सोने वाले सोते रहे


रजनी ने आँखें मूंदी 
प्रभात ने अंगड़ाई ली
सूरज की किरणें मचली
वातावरण की तन्द्रा टूटी
पक्षियों की चचाहट गूंजी
श्रष्टि पर हलचल मची
कर्म भक्तों की नींद उड़ी
सोने वाले सोते रहे
स्वप्न संसार में डूबे रहे
भाग्य को दोष देते रहे
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
कर्म,जीवन,जीवन मन्त्र

205-48--18--04-2014

When victory is out of sight


When
Nothing goes right
Victory out of sight
One feels defeated
Lives frustrated
Life becomes
A burden
Smile eludes
The face
Positive attitude
Keeping calm
Praying to god
Working on
Own’s strength
Learning from past
 Mistakes
Can only make
Life Rosy again
Defeat will certainly be 
Defeated by
Victory one day
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
Life,difficulties,depression ,frustration

204-47--18--04-2014

गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

गुजरता नहीं दिन गुजरती नहीं रात


गुजरता नहीं दिन
गुजरती नहीं रात
ना मिलता किनारा
ना डूबती नांव
ज़िंदगी मंझधार में
हिचकोले खाती रहती
सुकून की तलाश में
भटकती रहती है
निरंतर खुदा से
दुआ करती रहती
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
203-46--17--04-2014

सुकून,बेचैनी,शायरी,ज़िंदगी

कलम जब आग उगलती है


कलम जब
आग उगलती है
सत्य का
आह्वान करती है
मस्तिष्क पर
प्रहार करती है
आत्मा को
झकझोरती है
हृदय में बदलाव की
ज्वाला धधकती है
प्रजा 
सोते से जगती है 
सड़क पर निकलती है
क्रान्ति जन्म लेती है
सिंहासन की चूलें
हिलती हैं
सरकार बदलती है
नयी सुबह आती है
हर चेहरे पर संतुष्टी
मन में खुशी
आँखों में चमक होती है

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
कलम,सरकार,प्रजा,जनता,देश,क्रान्ति 

202-45--17--04-2014

बुधवार, 16 अप्रैल 2014

ज़िंदगी की खटर पटर


रेलगाडी की
किसी भी क्लास में बैठो
पटरियों की खटर पटर
कानों में आती 
रहती है
रेलगाडी की तरह  
ज़िन्दगी में भी 
खटर पटर चलती रहती धनाढ्य हो या गरीब
ऊंचे ओहदे पर बैठा हो
साहब के कमरे के बाहर
बैठा चपरासी हो
कुछ ना कुछ खटर पटर
चलती रहती
खटर पटर से खुद को
अभ्यस्त कर लो
सहने की आदत डालो
ज़िन्दगी के सफ़र में
मंजिल की तरफ बढ़ने में
आसानी होती
ऐसा नहीं करो तो
मन को परेशान होती
 इच्छा 
अनुरूप 
मंजिल नहीं मिलती
मन की पीड़ा निरंतर
बनी रहती 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

जीवन ,जीवन सफर ,जीवन मन्त्र
201-44--16--04-2014

क्या तुम दोगे मुझको क्या मैं दूंगा तुमको


क्या तुम 
दोगे मुझ को 
क्या मैं दूंगा तुम को
क्या तुम लाये थे
क्या मैं लाया था
जो भी देंगे लेंगे
सब खुदा ने दिया
मुझको तुझको
फिर क्यों झगड़ा
तेरे मेरे का
कम ज्यादा 
लेने देने का
सर पर अहम 
चढ़ा कर जीने का
क्या तुम दोगे मुझ को
क्या मैं दूंगा तुम को
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
200-43--16--04-2014

जीवन,जीवन मन्त्र,लेना देना ,व्यवहार

मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

भ्रम का अन्धकार


गिर गिर कर उठा हूँ 
रो रो कर हँसा हूँ 
मर मर कर जिया हूँ 
दिन रात जागा हूँ 
मन में बसा था
भ्रम का अन्धकार
जब भ्रम का 
पर्दा हटाया 
सत्य से 
साक्षात्कार हुआ 
मनप्रज्वलित हुआ 
जीवन जितना 
कठिन जाना था
उतना ही 
आसान निकला
जो भी भुगता
केवल सोच का 
नतीजा था

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
199-42--15--04-2014

जीवन,जीवन मन्त्र,सोच,अन्धकार,भ्रम

Love is the biggest dream


Love
Is the biggest 
Dream 
One can see
The biggest ambition
One can aspire for
It becomes
The biggest farce
When one is 
Deceived
No matter 
What may happen
Nobody stops
Dreaming
In the hope 
Farce becomes
A thought of past
When
Love turns 
Into reality
It Becomes the 
Biggest blessing 
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
198-41--15--04-2014
Love,blessing,farce

सोमवार, 14 अप्रैल 2014

हृदय में गहन अंधियारा है

हृदय में
गहन अंधियारा है
मन में अहम का
कोहरा भी कम नहीं
स्वार्थे के पर्दे ने
सोच को ढक दिया है
अब मनुष्य को
मनुष्य दिखता नहीं
लाभ की बात हो अगर
तो सम्बन्ध निभता है
नहीं तो कागज़ के
रद्दी टुकड़े की तरह
फाड़ कर कूड़े दान में
फैंक दिया जाता है
उस पर भी
ना लाज शर्म
ना पीड़ा मन में
हँसते हँसते
गर्व से खुद को
सबसे उत्तम मनुष्य
बताया जाता है 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
197-40--14--04-2014

स्वार्थ,अहम,जीवन,सम्बन्ध,जीवन मन्त्र

अब खुद के साये से भी घबराने लगा हूँ


अब खुद के 
साये से भी
घबराने लगा हूँ
कब दुश्मन बन कर
सामने खड़ा हो जाएगा
सुकून के बचे हुए  
चंद लम्हे भी छीन लेगा
डरने लगा हूँ
जब दिल के टुकड़े ही
बेवफा हो गए
खुद के साये पर
कैसे यकीन करूँ   
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
साये,डर,ज़िंदगी,शायरी
196-39--14--04-2014


छुपाने से अगर गम कम हो जाते


छुपाने से अगर
गम कम हो जाते
कोई अश्क़ ना बहाता
मगर
अश्क़ बहाने से भी
गम तो कम नहीं होते
बाहर आकर लोगों की
हँसी का बायस बनते हैं
खुदा पर यकीन
सब्र रखने के सिवाय
कोई उपाय नहीं होता
गम तो वक़्त के
साथ ही कम होते हैं
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
गम, अश्क़, शायरी

195-38--14--04-2014

मुझे ज़िंदगी में फ़रिश्ते नहीं चाहिए


मुझे ज़िंदगी में
फ़रिश्ते नहीं
चाहिए
जब चाहूँ
मिल ही न सकूँ
मिलना भी हो तो
ज़न्नत तक
पहुँचने के लिए
मौत का इंतज़ार
करना पड़े
मुझे ज़िंदगी में
इंसान चाहिए
जो मुझे समझे
जिसे मैं समझूँ
कंधे से कंधा
मिला कर जी सकूँ
साथ हँस सकूँ
साथ रो सकूँ
 डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
ज़िंदगी,इंसान,फरिश्ता ,इंसानियत

194-37--14--04-2014

रविवार, 13 अप्रैल 2014

तेरे गम मेरे गम किसके ज्यादा किसके कम


तेरे गम मेरे गम
किसके ज्यादा किसके कम
इस बहस में क्या रखा है
आज मेरे ज्यादा तेरे कम
कल तेरे ज्यादा मेरे कम
गम तो आने जाने हैं
ज़िंदगी का दस्तूर है
खुदा पर भरोसा करो
खामोशी से जीते जाओ
ना रुलाओ ना खुद रोओ
ज़िंदगी जैसे भी आये
वैसे ही जीते जाओ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
गम,ज़िंदगी,शायरी

193-36--13--04-2014

स्वयं को समझदार तो नहीं मानता


स्वयं को समझदार 
तो नहीं मानता
पर जीवन की 
जटिलताओं से
समस्याओं से
मनुष्य की भावनाओं से
कुंठाओं से इच्छाओं से
अहम् और निश्छल मन से
मेरा गूढ़ परिचय है
स्वयं अपनी कठिनाइयां
पूर्णतया दूर करने में तो
सक्षम नहीं हूँ
पर अपने अनुभव से
उन्हें सुलझाने में दूसरों की
सहायता अवश्य कर 
सकता हूँ
मुझसे समझदार उन्हें
मुझसे अधिक आसानी से
सुलझा पायेंगे
मुझसे कम समझदार
उन्हें सुलझाने की दिशा में
एक कदम आगे बढ़ जायेंगे
बस यही कामना कर
अपने अनुभव और समझ को
कलम के माध्यम से
कागज़ पर उकेरता हूँ
एक का भी
भला हो जाएगा तो
उसे भी अपनी ही
सफलता मान कर
संतुष्टि के लक्ष्य को
पाने के पथ पर
में भी एक कदम आगे
बढ़ जाऊंगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन जीवन मन्त्र,भावनाएं ,समस्याएं ,समझ ,सोच , कुंठाओं

192-34--13--04-2014