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शनिवार, 5 अप्रैल 2014

I am not a heartless person


My heart is like
Anybody else’s
Heart
My brain
Is like anybody’s
Brain
All said and done
My soul is different
From most people
It guides me
In difficult situations
Helps me in solving
My problems
Makes me happy
When I should be
Never let me cry
In the worst situation
Keep me composed
In difficult situations
The irony is
People think
I am a
Heart less person
Without a soul
Use only my brain
All the times
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
Heartless,soul,brain

173-15--05--04-2014

My age doesn’t debar my heart to go wild


My age
Doesn’t debar
My heart
To go wild
Neither
My mind
Debar me from
Seeing
Beautiful dreams
But my soul
Controls my emotions
Tames my heart
Asks it to behave
Decently
Guides
My mind
To take care of
My responsibilities
Not to deviate
From
Being a responsible
Honest
Human being
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
172-14--05--04-2014

Age,life,soul,

शक़ की बुनियाद पर

कभी हर मुलाक़ात को
नया साल समझते थे
अब साल गुजर जाता है
मगर याद तक नहीं करते
याद आते भी होंगे तो
जाहिर नहीं करते
मगर फिर भी
ना गिला ना शिकवा
उनसे हमको
हम जानते हैं
शक़ की बुनियाद पर
जीने वाले
ईमान से जीने वालों को
कभी नहीं समझते
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
171-13--05--04-2014
शक़,ज़िंदगी,


शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

प्रतीक्षा के क्षण


सुखद समाचारों की
प्रतीक्षा के क्षण
जब बेचैनियों  के
पहाड़ों की चोटियों को
छूने लगते
मन के समुद्र में
आशंकाओं की लहरें
हिलोरें लेने लगती
भावनाएं उथल पुथल
मचाने लगती
ह्रदय के द्वार पर 
निराशा
दस्तक देने लगती
ललाट पर पसीने की बूँदें 
छलकने लगती
एक अनकही अनुभूति
विचारों को जकड लेती
इन पलों के सुखद
अवसान की कामना
मन में जन्म लेने लगती
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
171-13--04--04-2014

प्रतीक्षा,आशंकाएं,भावनाएं,बेचैनियाँ

सड़क सीधी कदम फिर भी टेढ़े मेढ़े पडते


सड़क सीधी
कदम फिर भी
टेढ़े मेढ़े पडते
सड़क टेढ़ी मेढी
मगर कदम सीधे पड़ते
जो चलते सर उठा कर
घमंड में चूर
बेफिक्र हो कर
कदम उनके
डगमगाने लगते
गिरने पर उठ नहीं पाते
जो आँखें खोल
सर नीचा कर के चलते
कदम साध कर रखते
गिरे बिना लक्ष्य
तक पहुँच जाते
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

170-12--04--04-2014

राजनीति गज़ब की चीज़ होती है


राजनीति
गज़ब की चीज़ होती है
आम आदमी की
चल निकलती है
पीढ़ियों तक की
बन पड़ती है
कब ख़ास बन जाता है
खबर तक नहीं होती
लोगों के दिलों में
आग लगती है
धुंआ भी उठता है
चीखें भी निकलती हैं
मगर कुर्सी पर
बैठने के बाद
नेताओं की जुबां
दिन रात फिसलती है
मगर आँखों में
जलन नहीं होती
ना जाने उनकी आँखें
बंद कैसे रहती हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
169-11--04--04-2014


गुरुवार, 3 अप्रैल 2014

बहुत पाल चुके हो ईर्ष्या द्वेष को


बहुत पाल चुके हो
ईर्ष्या द्वेष को
शिरोधार्य कर चुके
अहम् को
ध्वस्त कर चुके
संबंधों को
अब समय आ गया है
ह्रदय को समझाने का
मन को पथ पर लाने का
दो कदम आगे बढाने का
बुझे दिए को जलाने का
संबंधों को बनाने का
बिखरे धागों को गूथने का
इर्ष्या को प्रेम में बदलने का
मनुष्य बन कर जीने का
अब समय आ गया है
जीवन सुखद बनाने का
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
168-10--03--04-2014

जीवन ,जीवन मन्त्र,ईर्ष्या द्वेष,प्रेम,सम्बन्ध,रिश्ते

स्वार्थ के सन्नाटों में


स्वार्थ  के सन्नाटों में
डूब चुकी है
बड़े बूढों के मुख से
सांय सवेरे
सुनायी देने वाली
मंगल ध्वनी
जीवन के शोर में
डूब चुकी है
अधिक पाने की होड़ में
बच्चों की किलकारी
स्वार्थ में लिप्त हो चुकी हैं
मर्यादाएं आस्थाएं
पथ भ्रष्ट हो चुकी है
मानवता
एकला चलो के सोच में
लुप्त हो चुकी हैं
परिवार की
परम्पराएं मान्यताएं
मैं और मेरे के सोच में
मनुष्य भूल चुका है
परमात्मा के नियम को
ईर्ष्या द्वेष में
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
167-09--03--04-2014

स्वार्थ ,अहम्,होड़,ज़िंदगी,जीवन मन्त्र 

चाहता नहीं हूँ


चाहता नहीं हूँ 
संसार से जाने के बाद 
मुझे कोई याद करे 
अच्छी बातें याद करके 
खुश होगा 
मगर बुरी बातों को 
याद करेगा तो 
मन में दुखी होगा
पहले ही बहुतों को 
दुःख पहुंचा चुका हूँ 
कम-स-कम 
जाने के बाद तो 
किसी को दुखी नहीं करूँ 
इस मंशा से चाहता हूँ 
कोई मुझे 
याद ही ना करे 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
166-08--03--04-2014

जीवन,यादें,याद,म्रत्यु

जिंदगी भर हक़ीक़तों में उलझता रहा


जिंदगी भर
हक़ीक़तों में 
उलझता रहा
कभी मैं 
हकीकत से दूर था
कभी लोग 
हकीकत से दूर थे
कभी मैं 
गलती पर था
कभी लोग 

गलती पर थे 
नतीजा 
कुछ ना निकला
पहले भी

चौराहे पर खडा था 
अब भी 
चौराहे पर खडा हूँ
हकीकत क्या है
जानने के लिए 
भटक रहा हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
165-07--03--04-2014

ज़िंदगी,हकीकत ,

बुधवार, 2 अप्रैल 2014

नारी की इज्ज़त लुटती सरे बाज़ार में


नारी की इज्ज़त
लुटती सरे बाज़ार में
सरकार उसकी चिंता
करती बंद कमरों में
नारी की तकलीफें
कभी कम होती नहीं
गिद्धों की हरकतें
दिन रात बढ़ती जाती 
नारी लाचारी में
ज़ुल्म सहती रहती
पुरुषों की फितरत पर
निरंतर उन्हें कोसती 
मजबूरी में फिर भी
पुरुषों की तरफ देखती 
सुसंस्कृत कहलाने वाले 
देश की त्रासदी  है
जिस का
मैं भी एक नागरिक हूँ
ज़ुल्म करने वालों के
बराबर का गुनाहगार हूँ
उनके जितनी ही सज़ा का
भागीदार हूँ
क्योंकि मेरे देश के
नेताओं को मैं ही संसद में
चुन कर भेजता हूँ
फिर चुपचाप सहम कर
उन्हें अपने पर
राज करते देखता हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
164-06--02--04-2014

नारी,स्त्री,देश,सरकार,ज़ुल्म ,नेता

क्या गुजरती होगी


क्या गुजरती होगी
==========
सोचता हूँ
क्या गुजरती होगी
घर बार से बिछड कर
गुमनामी में रहते
लोगों के दिलों पर
कितना सताती होंगी
अपनों की यादें
याद आते होंगे वो चेहरे
जिनके बिना कभी एक
पल भी नहीं गुजरता था
अब ज़िंदगी
गुजारनी पड़ रही है
घूमते  होंगे
आँखों के सामने
वो मकान वो गलियां
जिन में हँसते खेलते
दिन गुजरते थे
कहाँ गुम गए सब
मन सवाल पूछता होगा
दिन में कई बार
आँखों से
नीर बरसता होगा
क्या गुजरती होगी
घर बार से बिछड कर
गुमनामी में रहते
लोगों के दिलों पर

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
163-05--02--04-2014

गुमनाम,गुमशुदा,जीवन,ज़िंदगी,यादें

मोहब्बत को शतरंज का खेल मत समझो


मोहब्बत को
शतरंज का खेल
मत समझो
मुझे प्यादा खुद को
राजा ना समझो
तुम्हारे पास तो
ख़ूबसूरती का वज़ीर है 
चाहनेवालों के
हाथी घोड़े ऊँट भी हैं
कभी तिरछी चाल
चलते हो
कभी पीछे से वार
करते हो
कभी ढाई घर चल कर
मुझे भरमाते हो
जुदाई के वजीर से
शह देते हो
मात का डर दिखाते हो
मात ही देनी है
तो सामने से वार करो
कह दो मुझसे
मोहब्बत नहीं करते
इस तरह
तडपा तड़पा कर
ना मारो
मोहब्बत को
शतरंज का खेल
ना समझो
हर दिन नयी चाल
मत चला करो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
162-04--02--04-2014

मोहब्बत,प्रेम,प्यार,शतरंज ,जुदाई

मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

जब भी चैन मिला ज़िंदगी में


जब भी 
चैन मिला ज़िंदगी में
भारी कीमत 
चुकानी पडी मुझको
कभी दोस्ती 
दुश्मनी में बदलनी पडी
कभी ख्वाहिशों को
आग लगानी पडी
गिला नहीं मुझको
क्या क्या खोया मैंने
चैन की हर कीमत
कम ही लगी मुझको
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
चैन,ज़िंदगी ,कीमत, शायरी

161-03--01--04-2014

सीने में ग़मों की आग लगी हो


सीने में ग़मों की
आग लगी हो
दुआएं
काम ना करती हो
ज़िंदगी चौराहे पर
खड़ी नज़र आती 
जिधर भी दिख जाए
उम्मीद की रौशनी
ज़िंदगी उधर ही
दौड़ी चली जाती 
गर मिले नहीं सुकूं
वहाँ भी
तन्हाई जीने का
सहारा बन जाती
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

160-02--01--04-2014

I was always yours,now you are mine


I was always yours,now you are mine
======================
She was attractive
She was beautiful
She smiled
She waved
Sent messages
Every now and then
Blushed
When her eyes
Met mine
I tried my best
To talk to her
Ask the motive behind
She ran away
Either she was teasing
Or
She was shy
After taking
One step forward
Took two steps backwards
Unable to share
Her feelings with me
Many questions
Kept coming to my mind
Was she testing?
My patience
Or
Was she waiting?
For me to propose
Putting rest to
All speculations
And
Doubts in mind
One sunny morning
I caught hold of her
Took her hand in mine
Stared into
Her deep blue eyes
Asked her to tell
What’s in her mind?
Was she playing?
Or
Was she mine?
She giggled
She blushed
Her face turned red
Her breathing increased
I could hear her heart
Thumping
She squeezed my hand
In soft mesmerizing voice
She slowly replied
I was always yours
Now you are mine
Dr.RajendraTela,Nirantar
159-01-01--04-2014

Love,beauty   

सोमवार, 31 मार्च 2014

किस्मत का कैसा अजीब नज़ारा है


किस्मत का
कैसा अजीब नज़ारा है
दिखते नहीं वो चेहरे
जिन्हें देखना चाहता हूँ
दिखते हैं वो चेहरे जिनसे
दूर रहना चाहता हूँ
बात नहीं करते हैं वो
जिनसे बात करना 
चाहता हूँ
बात करते हैं वो
जिनसे बचना चाहता हूँ
दिल लगाते हैं वो
जिनसे खौफ खाता हूँ
जिन पर दिल आता है
वो मुझसे खौफ खाते हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
158-51-31--3-2014  

किस्मत,नज़ारा ,शायरी

The little pullet asked mother hen


The little pullet
Asked mother hen
Why can’t you
Fly as the eagle
Sing like a sparrow
Talk like a parrot
The mother hen
Replied
Nobody gets
Everything one wants
People
Make us their pet
Take care of our food
Keep us in cages
To save from
The prowling
Animals
We lay eggs
Give our life
Fill their appetite
For the courtesy
We get
Other birds do not get
What we get
Whether good or bad
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
Pullet=Offspring of a Hen
Courtesy,life,sacrifice

157-50-31--3-2014  

Will anybody tell?


Will anybody tell?
Is love
Living in hell
Or
The path to heaven
Testing
The patience
Every minute
Endless waiting
Without meeting
Day and night
Doing nothing
Only dreaming
Whether
Awake or sleeping
Thinking about
No other than
The beloved
Who
Keeps eluding
Leaving
The desires thirsty
And
The heart screaming
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
156-49-31--3-2014  

Love,hell,heaven 

I need to think more


I need to think more
Do more than I did
Behave better than
I have been behaving
Enjoy more than
I have been enjoying
Laugh more than
I have been laughing
But not forget
Hate people less than
I have been hating
Love people more than
I have been loving
Till now
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
155-48-31--3-2014  

Love,hate 

I concede


At times
Unintentionally
I slip from the
Platform of decency
To the ground of
Indecency
With all humility
I concede
Morally
This is not right
And
Expected from me
I bow my head
In shame
Ask for pardon
With a promise
To be careful
Not to repeat it
In future
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
154-47-31--3-2014  

Indecency,humility,decency,life

I don’t have time


I don’t have time
I don’t find time
I lack time
I keep on listening
Silly excuses
Pity the person
Expressing
See people
Spending time
On senseless things
Leaving important ones
On the side
I want to tell them
Time is not for sale
In the market
Neither can be bought
Nor borrowed from others
Everybody
Has equal time
Right attitude
Strong will
The urge to do
Determination
Can squeeze time
From the busiest
Schedule
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
153-46-31--3-2014  

Time,will,attitude,desire,motivational