ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 29 मार्च 2014

I do not want to deceive her


We
Like each other
Adore each other
Love each other
But
Neither do I reply
To her messages
Nor do I respond
To her proposals
I know our love
Can never reach to
Any conclusion
I do not want to
Deceive her
Take advantage
Of her obsession
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
149-42-29--3-2014  


प्रशंसा तो करना पर इतनी भी नहीं


प्रशंसा तो करना
पर इतनी भी नहीं
अहम् से भर जाऊं
घमंड में तन जाऊं
सर झुकाना ही भूल जाऊं
जिन क़दमों से चल कर
इस ऊंचाई तक पहुंचा हूँ
उन क़दमों को
देखना ही भूल जाऊं
चाहता हूँ निरंतर
याद करता रहूँ
हर उस इंसान को
ऊंचाई तक
पहुँचने के सफ़र में
साथ निभाया जिसने
नमन करता रहूँ
हर दुआ करने वाले को
जिनके बिना आज जहां हूँ
वहाँ होना
सम्भव ना होता  
प्रशंसा तो करना
पर इतनी भी नहीं
अहम् से भर जाऊं
घमंड में तन जाऊं
148-41-29--3-2014  
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
प्रशंसा,घमंड,अहम्,जीवन जीवन मन्त्र


उम्र के उन्माद में अनुभव के भ्रम में


उम्र के उन्माद में
अनुभव के भ्रम में
कही मेरी हर बात
उचित नहीं
तो अनुचित भी नहीं होती
हर बात को मानना
ना मानना
तुम्हारे विवेक पर
निर्भर करता है
विरोध भी करो तो
क्रोध करना उचित नहीं है
उचित लगे तो
स्वीकार कर लो
नहीं तो विनम्रता से
मना कर  दो
क्रोध में अपशब्द कहोगे
आपा खोओगे
भावनाओं को ठेस
पहुँचाओगे
तो मैं भी ज़िद पर
अड़ जाऊंगा
अनुचित को
उचित कहता रहूँगा
तुम्हारे बारे में
अच्छी भावना नहीं
रख पाऊंगा

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

147-40-29--3-2014  

शुक्रवार, 28 मार्च 2014

कुत्ता और इंसान (हास्य-व्यंग्य)

कुत्ता और इंसान
(हास्य-व्यंग्य)
इंसान को
कुत्ता कह दिया
इंसान गुर्राने लगा 
कुत्ते को इंसान कह दिया
कुत्ता गुर्राने लगा
बात समझ नहीं आयी
\मैं सर खुजाने लगा
कुत्ते ने देखा तो
हँसते हुए कहने लगा
परेशान क्यों होते हो
सच सुनोगे तो
तुम भी गुर्राने लगोगे
हमारे यहाँ
न जात पांत है
न रंग भेद है
न उंच नीच का झंझट
न भेद भाव है
न धर्म का चक्कर
फिर क्यों हमें इंसान
कह कर चिडाते हो
हमारी भावनाओं से
खिलवाड़ करते हो
फिर पूछते हो
हम इंसान कहने पर
क्यों गुर्राते हैं

डा.राजेंद्र तेला ,निरंतर
146-39-28--3-2014 
डा.राजेंद्र तेला ,निरंतर

हास्य,व्यंग्य,कुत्ता इंसान

पहला कदम खुद को ही बढ़ाना पड़ता है


महीनों तक कई 
मित्र ना मुझे फ़ोन करते हैं
ना ही किसी और तरीके से
संपर्क करते हैं
उनके व्यवहार से
परेशान नहीं होता हूँ
सोचता हूँ
व्यस्त होंगे
अपनी परेशानियों को
सुलझाने में लगे होंगे
पर मुझे याद
अवश्य करते होंगे
खुद फ़ोन उठाता हूँ
उनसे बात करता हूँ
मेरे लायक
कोई कार्य हो तो पूछता हूँ
दिनों तक
बात नहीं करने के लिए
क्षमा माँगता हूँ
पर संपर्क नहीं करने के लिए
उनसे शिकायत नहीं करता
सोचता हूँ
रिश्तों को बनाये रखने के लिए
अहम् को
त्यागना आवश्यक होता है
पहला कदम
खुद को ही बढ़ाना पड़ता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
145-38-28--3-2014

रिश्ते,पहल,अहम्,जीवन,जीवन मन्त्र

गुरुवार, 27 मार्च 2014

कोई रात निशब्द नहीं होती


कोई रात
निशब्द नहीं होती
कोई दिन
शोर भरा नहीं होता
जीवन में अकेला पन हो
भाग्य साथ ना हो
चैन से दूरी हो
हर इंसान पराया
हर रात हर दिन
इकसार लगता
समय काटे नहीं कटता
जीना मौत से भी
बदतर लगता 

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
144-37-27--3-2014


चैन,असंतुष्टि ,बेचैनी ,दुःख,जीवन

There was no one to guide me


When
I was young
I could not think
The way
I think now
I could not achieve
What I am able to
Achieve now
There was no one
To guide me
But
I do not regret
With my experience
And
Guidance
If even a single soul
Can achieve
What I could not
Can think
Better than
What I thought
I shall feel
I have achieved
More than
What
I have been able to
Achieve so far
Dr.RajendraTela,Nirantar
143-36-27--3-2014

Experience,life,achievement 

बुधवार, 26 मार्च 2014

केवल अनुभव बाँट सकता हूँ


मैं वकील नहीं हूँ
हर बात पर
तर्क वितरक करूँ
मैं अभिनेता भी नहीं हूँ
चेहरा बदलता रहूँ
मैं खुदा भी नहीं हूँ
हर दुःख को दूर
कर सकूं
मैं आम आदमी हूँ
केवल
अनुभव बाँट सकता हूँ
जो मैंने सहा
तुम्हें नहीं सहना पड़े
निरंतर
इस का प्रयास कर
सकता हूँ
ईश्वर से तुम्हारी
सफलता की कामना
कर सकता हूँ
संसार से
सदा लिया ही लिया
इस बहाने
थोड़ा सा लौटा भी दूं 
142-35-26--3-2014
अनुभव,जीवन,बांटना,जीवन मन्त्र

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

रिश्तों को नाम ना दो


रिश्तों को
नाम ना दो
अनाम ही
रहने दो
ना छोटे बड़े का
भान हो
ना अनुभव का
अहसास हो
ना कोई दोस्त
ना कोई दुश्मन
रिश्तों की थाली मै
हर इंसान एक हो
दिल से दिल
मन से मन मिले
ना अपेक्षा दो
ना अपेक्षा करो
एक दूजे के लिए
निस्वार्थ जीते रहो
दो शरीर
एक जान रहो
रिश्तों को
नाम ना दो
उन्हें अनाम ही
रहने दो

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
141-34-25--3-2014

जीवन,जीवन मन्त्र,रिश्ते,रिश्ता,सम्बन्ध
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

मंगलवार, 25 मार्च 2014

Death is inevitable


Death is inevitable
Can come immediately 
After birth
After living long 
Torrid years 
Or 
In an obscure manner 
One may be buried
Burnt
Flown in a river
Or 
Left as food 
For hungry vultures
The end may vary
But there is 
No escape route
For any life
Death has to come
One day 
Like the changing 
Weather
The flowing water
The changing faces of
The wind 
One who lives with 
Honesty 
Rests in peace
141-34-25--3-2014
Life,Death
Dr.Rajendra Tela,Nirantar 


ना जाने कब तक


ना जाने
कब तक चलेगा सिलसिला
दिल के मिलने बिछड़ने का
हीर रांझा
लैला मजनूँ के फसानों का
रातों की नींद उड़ती रहेंगी 
दिन गुजरते रहेंगे बेचैनी में
दिल की
गर हसरत पूरी हो भी जाए
आखिर तो
एक दिन जुदा होना ही पडेगा 
मोहब्बत का
सिला तो दर्द भरा ही मिलेगा
किसी ना
किसी को तो रोना ही पडेगा
ज़िंदगी के आखरी लम्हों में
अकेले रहना ही पडेगा
ना जाने
कब तक चलेगा सिलसिला
दिल के मिलने बिछड़ने का

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
140-33-25--3-2014
हीर रांझा ,लैला मजनूँ ,मोहब्बत,प्यार ,मिलना बिछड़ना 

समझना समझाना


कुछ लोग
निरंतर प्रश्न करते हैं
आपकी कई बातें
हमें समझ नहीं आती हैं
उत्तर में बस
इतना ही कहता हूँ
किसी को
सारी बातें समझाना
सम्भव नहीं होता
कई बार
ह्रदय की बात मन
मन की बात ह्रदय भी 
समझ नहीं पाता

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
139-32-25--3-2014

मन,ह्रदय,संवाद,समझना,समझाना,जीवन,जीवन मन्त्र

सोमवार, 24 मार्च 2014

Yesterday,Today,Tomorrow


Yesterday
Was always there
Tomorrow
Will also come  
It is today
Which matters
The most
Learn
From yesterday
Put it into today
Make tomorrow
As beautiful
As you desire
Smile more than
Ever before
Dr.Rajendra Tela,Nirantar 
138-31-24--3-2014
Yesterday,Today,Tomorrow,Life,

हमें भूल गए या अब भी याद करते हो

हमें भूल गए या अब भी याद करते हो
====================
बीते दिनों के
खुशनुमा लम्हों के
सफ़र को याद कर
अब भी
हमारा नाम लेते हो
या हमें भूल गए
हमें पता है
तुम बेवफा 
ज़रूर हुए
मगर इतने
खुदगर्ज़ नहीं हो
सच से मुंह मोड़ लो
दिल के किसी ना
किसी कोने में
अब भी हमें
छुपा कर रखते हो
यकीन से 
कह सकता हूँ
कोई मज़बूरी ही 
रही होगी
तुम्हें बेवफा 
होना पड़ा
वर्ना तुम्हारी 
फितरत में
बेवफाई हो ही 
नहीं सकती
गर होती तो 
हमारे दिल को
तुम्हारी मोहब्बत
कभी मंज़ूर 
नहीं होती
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
प्यार,मोहब्बत,बेवफाई,शायरी
137-30-24--3-2014



रात सपने में आ गया कोई


रात सपने में
आ गया कोई
ज़िंदगी भर के लिए
नींद उड़ा गया कोई
कैसे सुनाऊँ
क्या कह गया कोई
कैसे बताऊँ
क्या कर गया कोई
प्रेम का
पाठ पढ़ा गया कोई
लाज शर्म
भुला गया कोई
खूबसूरत अहसासों से
भर गया कोई
खुद को दिल में 

बसा गया कोई
बेचैनी का तोहफा
दे कर 

छुप गया कोई
रात सपने में
आ गया कोई
ज़िंदगी भर के लिए
नींद उड़ा गया कोई


डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
136-29-24--3-2014
प्रेम,सपना,ख्वाब,मोहब्बत,प्यार

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

रविवार, 23 मार्च 2014

Music without melody


Music without
Melody
A bird without
A melodious voice
A song without
Rhythm
A face without
A smile
A person always
Crying
An aroma less
 Flower
Does not attract
A single soul
A life without
Melody
Is an unwelcome
Burden
On every body
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
135-28-24--3-2014

Music,life,melody,arome,flower 

चुपके से आ कर


चुपके से आ कर 
सोते से जगा दे कोई
ज़िंदगी को 
नए ख़्वाबों से 
सजा दे कोई
ज़िंदगी भर
साथ साथ चले
हर पल हँसाते रहे
काँटों से बचाते रहे
क़दमों में
फूल बिछाते रहे
आगोश में ले
प्यार उंडेलते रहे
एक पल भी
अकेला ना छोड़े
अकेला नहीं हूँ
अहसास से सरोबार रखे
जिए तो मेरे लिए
मरे तो मेरे साथ मरे
दो ज़िस्म एक जान हैं
इस अहसास से
कभी जुदा ना करे
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
134-27-23--3-2014
प्यार,प्रेम,मोहब्बत,ज़िंदगी,