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शनिवार, 22 मार्च 2014

I am what I am


I am what I am
Accept me
Reject me
I am what I am
I love
I hate
I have friends
I have enemies
I speak the truth
Dislike lies
Try to follow
What I think
What I say
Is right
To save the truth
Readily sacrifice
Morals
With a small lie
Forgive and forget
My life’s theory
Integrity honesty
My passion
Take life as it comes
My policy
I am a human being
Commit mistakes
On day to day to basis
I am not the best
I am not the worst
Is what I feel
Ready to accept 
Failures
With a big smile
Accept mistakes
Without crying
I am what I am
Accept me
Reject me
I am what I am
133-26-22--3-2014

Dr.Rajendra Tela,Nirantar 

यादों की खुमारी को टूटने मत दो

यादों की खुमारी को 
टूटने मत दो
यादगार लम्हों की
कहानी को मरने ना दो
कुछ आसूं भी गिरेंगे
मन दुखी भी होगा 
हँसी भी आयेगी
खुशी में 
आँखों के कोरों से
नमी भी झाँकेगी
दिल में टीस भी उठेगी 
भृकुटी भी तनेगी
हर बार यही होता रहेगा 
सुधरने सुधारने का 
अवसर मिलेगा 
मन मंथन का मौक़ा भी 
मिलता रहेगा 
जीने का मकसद भी
बना रहेगा 
ज़िंदगी में खट्टा मीठा  
स्वाद आता रहेगा 
यादों की खुमारी को 
टूटने मत दो
यादगार लम्हों की
कहानी को मरने ना दो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
133-26-22--3-2014

यादगार,याद,यादें ,ज़िंदगी

कांच के छोटे छोटे टुकड़े


कांच के लोग
कांच के दिल
कांच से रिश्ते
कांच सा प्यार
कांच सा सोच
कांच से विचार
कांच सी हँसी
कांच सी मंज़िल
कांच सा मकसद
ज़रा सी ठेस से 
टूट जाते हैं
हमेशा के लिए
छिन्न भिन्न
हो जाते हैं
रह जाते हैं
कांच के
छोटे छोटे टुकड़े
रास्ते में आ जाएँ
ज़िंदगी को 
लहुलुहान कर देते हैं
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
132-25-22--3-2014

जीवन,रिश्ते,कांच ,कमज़ोर,


शुक्रवार, 21 मार्च 2014

The web of dreams


Dreams are
Sometimes so deceptive
They give false hope
Sometimes so encouraging
They make one fight more
Sometimes an illusion
Vanish before
Achieving the goal
Sometimes
A reason to do more
Sometimes
Give so many thrills
One loses the fighting spirit
Dreams are no less than
A spider’s web
Getting in to them is easy
Getting out is
Impossible
131-24-21--3-2014
Dreams,illusion,deceptive

Dr.Rajendra Tela,Nirantar

बुत-परस्तों का ज़माना है


बुत-परस्तों का
ज़माना है
सीरत से
क्या लेना देना
खुद-परस्ती
जीने का तरीका है
ईमान से
क्या लेना देना
दौलत का नशा 
हर मय के
नशे से ज्यादा है
ना खुदा परस्त कोई
ना खुदा से डर 

किसी को
अब चेहरे पर चेहरा
चढ़ा कर जीने का 

ज़माना है  
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
130-23-21--3-2014

बुत परस्त,खुद परस्त,खुदा परास्त,चेहरे पर चेहरा,ज़िंदगी,जीवन

बुधवार, 19 मार्च 2014

बहुत शोर के बाद आता है सन्नाटा


बहुत शोर के बाद
आता है सन्नाटा
बहुत सन्नाटे के बाद
आता है शोर
शोर भी रुलाता है
सन्नाटा भी रुलाता है
क्यों ज़िंदगी में
शोर सन्नाटे की बीच
संतुलन नहीं होता
प्रश्न सदा से
झंझोड़ता रहा है
ना जाने कब तक
झंझोड़ता रहेगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
129-22-19--3-2014
शोर ,सन्नाटा, ज़िंदगी

मंगलवार, 18 मार्च 2014

रोज़ एक नया दुश्मन बना लेता हूँ


अच्छे मौसम को भी
बर्बाद कर देता हूँ
किसी ना किसी को
आइना दिखा देता हूँ
जिस सुकून के खातिर
ज़िंदगी भर लड़ता रहा
उसी के आगे दीवार
खड़ी कर देता हूँ
रोज़ एक नया
दुश्मन बना लेता हूँ 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
128-21-18--3-2014

आइना दिखाना,

सोमवार, 17 मार्च 2014

Truth is not only bitter but arrogant also


Truth is
Not only bitter
But arrogant also
Hits one more than
Any weapon can hurt
Pains more than
Any wound does
Causes hatred
Ignites fire of enmity
Many a times
Friends become foes
Foes become friends
May remain
Hidden for ages
Can get exposed
In a second
Everybody likes to
Speak others truth
Hide their own
Under heap of lies
Glitters like a diamond
When it helps one
Looks as dark as coal
When it exposes one
Strange is the
Nature of truth
Everybody says
Truth is supreme
Find it difficult to accept
When it relates to
One’s own self
Dr.Rajendra Tela,Nirantar 
127-20-18--3-2014
Truth

रविवार, 16 मार्च 2014

टूटा हूँ मगर बिखरा नहीं


टूटा हूँ
मगर बिखरा नहीं
हँस नहीं सकता
मगर रोता नहीं
सब्र से
दोस्ती रखता हूँ
उम्मीदों के
साये में जीता हूँ
निरंतर खुदा से
इबादत करता हूँ
पहले भी
कभी हारा नहीं
इस बार भी नहीं
हारूंगा
इस यकीन पर
ज़िंदा हूँ 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

हार जीत,जीवन,