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शुक्रवार, 14 मार्च 2014

Voice of truth


However
Logical sensible
It may be
Voice of truth
Honest reasoning
Is crushed by
Crude majority
Violent power
Blind authority
Friends
Turn enemy
Nod their head
Shamelessly
Surrendering their
Conscience to
Selfish motives
Join the forces
Devoid of humanity
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
125-18-14-3-2014

Truth,power,majority,repression 

बचपन का प्यार


प्यार क्या होता है
बचपन में किसी ने
बताया तो नहीं पर
अहसास ऐसा ही होता था
जैसा जवानी में होता है
वही मिलने की इच्छा.
घंटों साथ गुजारना
साथ खेलना खाना
मुलाक़ात न हो तो
बेचैन हो जाना
हर अंदाज़ लुभावना
लगता था
समझ नहीं फिर भी
उसके बिना
सब अधूरा लगता था
अब समझ गया
प्यार प्यार होता है
हर उम्र में एक सा
अहसास देता है
124-17-14-3-2014
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

प्यार,जीवन,बचपन,मोहब्बत,अहसास

गुरुवार, 13 मार्च 2014

माँ और संतान


 
जन्म होते ही 
संतान के मुंह से 
माँ शब्द निकला
ना किसी ने कहा
ना किसी ने 
सिखाया समझाया
प्रश्न का उत्तर 
कभी नहीं मिला
कैसे पता चला 
जिसकी कोख से 
जन्म लिया 
उसे माँ कहना है
जीवन भर 
ह्रदय में बसाना है 
ईश्वर के साथ 
उसे भी पूजना है
माँ और संतान की 
आत्माओं का 
सम्बन्ध ही 
संतान को माँ 
कहना सिखाता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
123-16-13-3-2014
माँ, संतान

ज्ञान और अनुभव


मेरे पास देने के लिए
अधिक तो नहीं
पर फिर भी कुछ ज्ञान
कुछ अनुभव अवश्य है
जिन्हें बांटने के लिए
सदा तैयार रहता हूँ
मैं यह तो नहीं कहता
मेरे अनुभव मेरा ज्ञान
किसी का भला कर पाएंगे
मगर इतना अवश्य
कह सकता हूँ
ज्ञान और अनुभव
बांटने से निरंतर बढ़ता है
पृथ्वी के एक छोर से
दूसरे छोर तक पहुँचता है
किसी ना किसी के काम
अवश्य आ सकता है
122-15-13-3-2014

ज्ञान,अनुभव, जीवन,जीवन मन्त्र
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

बुधवार, 12 मार्च 2014

कर्तव्य निभाती आशाएँ


आशाएं
ले कर आता है
नया दिन
यथार्थ की तेज धूप में
पिघल जाता है दिन
आशाएं ना थकती
ना हार मानती
धैर्य से नए दिन की
प्रतीक्षा करतीं
थकता है तो मनुष्य
हार मानता है
तो मनुष्य
उसे ही सहना होता है
घुट घुट कर जीना होता है
आशाओं की जेब से तो
कुछ नहीं जाता
उन्हें तो केवल कर्तव्य
निभाना होता है
उसमें वो कभी
निर्बल नहीं पड़ती
जीने का
बहाना देती रहती
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
121-14-12-3-2014
जीवन,जीवन मन्त्र, धैर्य,आशाएं    

मार्ग दर्शन


उचित 
पालन पोषण से
नन्हे बीज से ही
बड़े वृक्ष जन्म लेते हैं
नन्हे शिशु  हुष्ट पुष्ट
मनुष्य बनते है
उचित मार्ग दर्शन से
साधारण लोगों में से 
असाधारण लोग
निकलते हैं
प्रतिभाशाली
जगत में 
नाम करते हैं
120-13-12-3-2014
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
पालन पोषण,जीवन,जीवन मन्त्र,

मार्ग दर्शन

वो बेचैन ,मैं सुकून से कैसे रहूँ ?


वो खुश नहीं
मैं खुश 
कैसे खुश रहूँ ?
वो रोये 
मैं हँसू 
ये मुमकिन नहीं
दिल की डोर से 
बंधी हैं
वो डूबे मैं तैरूं,
संभव नहीं
वो ज़िंदगी से 
लड़ रही
मैं जीत के गीत
कैसे गाऊँ ?
जान से ज्यादा 
चाहता हूँ
वो बेचैन
मैं सुकून से 
कैसे रहूँ ?
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
10-08-2011
1328-50-08-11

मंगलवार, 11 मार्च 2014

एक दिन दुविधाएं भी थक जाएंगी


दुविधाएं
जब बिना मांगे ही
गले पड़ जाती हैं
उनसे इतना
अपनापन हो चुका है
क्यों ना परमात्मा से
मांग कर गले लगाऊं
उनसे प्रेम 
सम्बन्ध बनाऊं
मेरा मन कहता है
जैसे खुशी
थक गयी मुझसे
एक दिन दुविधाएं भी
थक जाएंगी
स्व्यं मुझसे रिश्ता
तोड़ लेंगी
अपनी याद में
मुझे नयी दुविधा
प्रदान कर देगी
119-12-11-3-2014
दुविधा, जीवन जीवन मन्त्र,  

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

क्यों नश्वर चीज़ों से दिल लगाऊं


क्यों नश्वर
चीज़ों से दिल लगाऊं
ज़मीन जायदाद से
मोह बढ़ाऊं
सोने चांदी की
चमक में खोता रहूँ
स्वार्थ के 
मकड़ जाल में
उलझता रहूँ 
किसी के 
दिल से दिल
मन से मन
मिलता नहीं
प्रेम बढ़ता नहीं
क्यों मरीचिकाओं के
पीछे भागता रहूँ
भ्रम में जीता रहूँ
जीवन भर रोता रहा
जाते जाते भी 
रोता रहूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
118-11-11-3-2014

नश्वर,जीवन,जीवन मन्त्र,इच्छाओं

सोमवार, 10 मार्च 2014

Sunrise and sunset of love


Whenever I talk to you
I tell you
We are good friends only 
There is no motive of love
Behind my relations with you
The truth is contrary to
What I have been saying
I love you
To the core of my heart
How to share the truth
The question has
Snatched my peace
My life is in turmoil
Further delay would
Lead me into the
Dark world of depression
I am left with
No other choice
But to express
My pious love for you
It is up to you
Whether you accept it
For its purity
Or
Take it as breach of trust
Start hating me for
Repeatedly lying
I assure you
With all honesty
At my command
My love is pious
Accepting it would be
A new sunrise
Denying it
The last sunset of
My life
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
117-10-10-3-2014
Love,pious love,pure love



क्या कहूँ क्या सुनूँ


क्या कहूँ क्या सुनूँ
मेरा तेरा  एक ही अफ़साना
हँसने रोने का  वही खट्टा मीठा मसाला
अपनी  कह भी दूं  तेरी सुन भी लूं
कुछ पल तुझ को  हँसा दूंगा
दुखों को कम होने का आभास करा दूंगा
कुछ पल तूँ  मुझ को रुला देगा
भूले ज़ख्मों को हरा करा देगा
रोने का  नया बहाना दे देगा
इससे अधिक न  मैं कुछ कर सकूंगा
न तूँ कुछ कर सकेगा
फिर क्या कहना  क्या सुनना
जो भी करना जो भी सोचना
अच्छे कल के लिए  करना
पर आज तो  हँसते हँसते जीना है

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
116-09-10-3-2014

यादें,अफ़साने,ज़िंदगी,जीवन

रविवार, 9 मार्च 2014

Immortal Love

Nothing else flows
As  freely as the
The gushing rain water
The furious winds of
A devastating storm
The flames arising
From a heap of
Dry wood
Than pure pious
And
Sacred Immortal Love
Evolving from
Two innocent souls
Made for each other
© Dr.Rajendra Tela,Nirantar
115-08-09-3-2014


Love,Immortal love 

कोई हार कोई जीत अंतिम नहीं होती


कोई हार कोई जीत
अंतिम नहीं होती
हर हार
मन में निराशा की
टीस जन्मती है
हर जीत
मन में अहम् भरती है
कर्म पथ से ना भटको
सार्थक सोच रखो 
हार 
जीत में बदल जाती है
पथ से भटक जाओ
जीत को सर चढ़ाओ
जीत हार बन जाती है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
113-06-09-3-2014

हार,जीत,सोच.अहम्,जीवन,जीवन मन्त्र