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शनिवार, 8 मार्च 2014

यूँ बार बार इम्तहान मत लिया करो


यूँ बार बार
इम्तहान मत लिया करो
पाक मोहब्बत पर
सवाल खड़े मत किया करो
दबे पाँव ख़्वाबों ख्यालों में
मत आया करो
ये दिल तुम्हें चाहता है
तुम्हारा हर अंदाज़ जानता है
इस तरह इसे सताया  मत करो
प्यार का मोहताज है
इसे प्यार से रखो करो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
112-05-08-3-2014
प्यार,मोहब्बत,शायरी

शुक्रवार, 7 मार्च 2014

शहादत का मूल्य


जब मरता है कोई नेता
झुकाया जाता है झंडा
मनाया जाता है शोक
हो जाता है काम काज बंद
ठहर जाता है देश
जब होता है सरहद पर
देश की रक्षा के खातिर
कोई जवान शहीद
बातों से दुःख जताया जाता
पैसों से लुभाया जाता
फिर ना होगा ऐसा कभी
दुश्मन को सबक
सिखाया जाएगा
निरंतर
विश्वास दिलाया जाता
कोई काम रुकता नहीं
कोई नेता रोता नहीं
कोई कुछ करता नहीं
जब होता है
कुछ समय बाद  फिर
एक और जवान शहीद
फिर से इन्ही बातों को
दोहराया जाता
मगर फिर भी कहीं
कुछ रुकता नहीं
कहीं कुछ ठहरता नहीं
कुछ बदलता नहीं
बस बहते हैं आसूं उनके
जिनका कोई अपना
शहीद होता है
जी भर आता जब
शहादत का मूल्य
देखता हूँ
****
111-04-07-3-2014 
शहीद,देश,देश रक्षा,नेता,मात्र भूमि, शहादत
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर


गुरुवार, 6 मार्च 2014

कौन अपना कौन पराया


जब तक  
 अहम् से अहम्
इच्छाओं से इच्छाएं
आशाओं से आशाएं
नहीं टकराएं
कौन अपना
कौन पराया
पहचान में नहीं आता
केवल
हँस कर बोलने से
रिश्ते जोड़ने से
समय साथ गुजारने से 
कोई अपना नहीं 
हो जाता
111-03-06-3-2014
अहम्,अपना,पराया ,

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

बुधवार, 5 मार्च 2014

कल इधर था आज उधर हो गया


कल इधर था
आज उधर हो गया
ना जाने दोस्त
कब दुश्मन बन गया
हम ऐतबार के
समंदर में
गोते लगाते रहे
कोई खुदगर्ज़ी के
खंज़र से वार कर गया
नफरत के गड्डे में
धकेल गया
ऐतबार को
चुल्लू भर पानी में
डुबों गया
110-02-05-3-2014
ऐतबार,विश्वास,दोस्त,दुश्मन

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

कभी कभी


कभी कभी
करने का नहीं
करते देखने का
मन करता है
कहने का नहीं
सुनने का
मन करता है
लिखने का नहीं
पढ़ने का
मन करता है
दूसरों को
जानने समझने का
मन करता है
अहम् से 
ऊपर उठ कर
सोचना पड़ता है
109-01-05-3-2014
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

अहम् ,जीवन