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शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

The screaming heart


Will anybody tell?
Is love
Living in hell
Or
The path to heaven
Testing
The patience
Every minute
Endless waiting
Without meeting
Day and night
Doing nothing
Only dreaming
Whether
Awake or sleeping
Thinking about
No other than
The  beloved
Who
Keeps eluding
Leaving
The desires thirsty
And
The heart screaming
108-53-28-2-2014
Hell,heaven,love,heart,desires

Dr.Rajendra Tela,Nirantar

पक्षी पर कविता -मैं पंछी जगत का

(पक्षी पर कविता )
मैं पंछी जगत का
मैं पंछी जगत का
यह धरती गगन
यह संसार मेरा
ना सीमाओं का बंधन
ना किसी का पहरा
वृक्षों पर नीड़ बनाऊं
ताल तलैय्या में
प्यास बुझाऊँ
दाने चुग्गे से
भूख मिटाऊँ  
पंख फैलाऊं
उन्मुक्त उड़ूँ
पर्वत सागर पर
विजय पाऊँ
जहां जमाऊँ डेरा
वहीं बसेरा मेरा
ना कोई देश
ना विदेश मेरा
मैं पंछी जगत का
यह धरती गगन
यह संसार मेरा

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
107-52-27-2-2014
पंछी,पक्षी,गगन,धरती,नीड़,प्रकृति
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर



गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

When the mind over rules the heart


Some times
When the mind
Over rules
The heart
One has to stop
Sacrifice
The wishes
Kill the desires
resulting in a decision
That ultimately
Does not prove to be
The right decision
Only to remain
In the memory
Throughout the life
As a regretful
Decision
106-51-27-2-2014
Dr.Rajendra Tela,Nirantar
Decision,emotions,heart,mind


ये किस की हँसी गूंजी

ये किस की हँसी गूंजी
गुल खिलने लगे
फ़िज़ाओं में बहार
आ गयी
ज़मीन का ज़र्रा ज़र्रा
महकने लगा
भौरें गुंजन करना
चिड़ियाएँ
चचाहाना भूल गयी
सुरीली आवाज़
कानों से उतर कर
दिल में पहुँच गयी

ये किस की हँसी गूंजी 
दिल को मंज़िल की
खबर हो गयी

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

105-50-27-2-2014
हँसी,मोहब्बत,प्यार,बहारें

या तुम को पता है,या मुझको पता है


हमारे
बीच की कई बातें
या तुम को पता है
या मुझको पता है
पहली बार मिले थे जब
क्या तुमने कहा
क्या मैंने कहा
कितने वादे किये
कितने तोड़े
प्रेम में
क्या क्या बोल बोले
क्रोध में कितने
अनुचित शब्द कहे
या तुम को पता है
या मुझको पता है
तुम्हारी व्यथा में
कैसे मैंने हिम्मत दी
मेरे दुःख में तुमने
कैसे हिम्मत बंधाई
या तुम को पता है
या मुझको पता है
जो साथ सहा
साथ भुगता
कितना साथ रोये
कितना साथ हँसे 
या तुम को पता है
या मुझको पता है
मेरे जाने के बाद
तुम्हें क्या करना
क्या नहीं करना
अकेला रह जाने पर
मुझे क्या करना
क्या नहीं करना
या तुम को पता है
या मुझको पता है
बस इतनी सी इच्छा है
संसार से उठने के बाद
हमारे साथ हमारी
बातें भी उठ जाए
कोई जान ना सके
जो मुझको पता है
जो तुमको पता है  
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
104-49-27-2-2014
पति पत्नी,रिश्ता,सम्बन्ध,दाम्पत्य जीवन, 


The curse and blessing of blindness


Blindness
Is not only curse
But blessing
In disguise too
If one misses  
Seeing
Beautiful faces
Wonders of nature
Sky touching
Mountains
Flowing rivers
Blooming flowers
Colorful birds
Innocent children
One does not
Have to see
Hungry children
Sick old people
Gruesome murders
Heart
Breaking accidents
Disfigured faces
Hate and jealousy
Black hearts
Impure minds
103-48-27-2-2014
Blindness,curse,blessing

Dr.Rajendra Tela,Nirantar

बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

दिल की सुनूँ दुनिया की सुनूँ


दिल की सुनूँ
दुनिया की सुनूँ
हँस के जीऊँ
घुट घुट के जीऊँ
हर मन में
यही शोर उठ रहा है
खामोशी से
जान ले रहा है
एक ओर
खुशियों की नदी   
दूसरी ओर
दुखों का समुद्र
जाऊं तो किधर जाऊं 
हर इंसान सोच में
डूबा है
अधमरा सा जी रहा है
लड़खड़ाता हुआ
चला जा रहा है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर   
102-47-26-2-2014
जीवन,सोच,कुंठाएं ,खुशी दुःख

Love crime


Neither liking her
Is a crime for me
Nor liking me
a crime for her
If our liking
Does not reach to
Its logical conclusion
It will be either
Mine or hers
Crime
If it reaches
It will be
Mutual liking
Turned into
Immortal love
101-46-26-2-2014
Love,crime

Dr.Rajendra Tela,Nirantar

I eagerly wait for her

I eagerly
Wait for her
Not to
Talk to her
Love her
Laugh together
Share
Thoughts with her
She keeps my
Memories alive
Her face
Resembles
The face
Of my dearest
Friend
Who is not alive  
Dr.Rajendra Tela,Nirantar 
100-45-26-2-2014
Love,memory,resembelance,

मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

अब कलम की स्याही बदलना चाहता हूँ


अब कलम की स्याही
बदलना चाहता हूँ
विविधता के रंगों से
भरना चाहता हूँ
हर्षोल्लास के शब्दों से
सजाना चाहता हूँ
फूलों की कोमलता
का आभास
पगडंडियों जैसे
जीवन की
जटिलताओं की
अनुभूती
कराना चाहता हूँ
जीवन का हर पह्लू
द्रष्टिगत हो जाए
पढ़ने वाले अपने
जीवन से जोड़ सके
कुछ सीख सके ,
कुछ समझ सके
विपत्तियों से लड़ सकें
ऐसा कुछ लिखना
चाहता हूँ
अब कलम की स्याही
बदलना चाहता हूँ
अनुभव जगत में
बांटना चाहता हूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
99-44-25-2-2014
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

जीवन,अनुभव,लिखना ,बांटना

ऐसी ज़िंदगी का क्या मतलब


ऐसी ज़िंदगी का
क्या मतलब
जिसमें
हँसने के लिए
रोना पड़ता है
मोहब्बत के लिए
नफरत को
सहना पड़ता है
जीने के लिए
तिल तिल मरना
पड़ता है
रिश्तों को ढोना
पड़ता है
कल क्या होगा
सोचना पड़ता है
जज़बातों के हाथो
खुद को गिरवी
रखना पड़ता है
उम्मीद के सहारे
जीना पड़ता है

98-43-25-2-2014
ज़िंदगी,जीवन,नफरत,मोहब्बत,उम्मीद,

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

सोमवार, 24 फ़रवरी 2014

नए चेहरे की तलाश में


निरंतर तलाशता हूँ
एक चेहरा
जो समझ सके
समझा सके मुझ को
मिलता भी है
पर रुक जाता हूँ
आगे बढ़ते बढ़ते
सहम जाता हूँ
सोच कर
क्या कहेगी दुनिया
क्या कहेंगे लोग
लौट जाता हूँ
पुराने घरोंदे में
जीता हूँ
अनमने भाव से
फिर निकल पड़ता हूँ
एक नए
चेहरे की तलाश में
*****
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
97-42-23-2-2014

तलाश,जीवन,इच्छा ,कुंठा

रविवार, 23 फ़रवरी 2014

बेकार


चाबी नहीं तो ताला बेकार
ताले बिना चाबी बेकार
विवेक नहीं तो बुद्धि बेकार
लक्ष्य बिना मेहनत बेकार
धैर्य नहीं तो कर्म बेकार
सहनशीलता बिना जीवन बेकार
सीरत नहीं तो सूरत बेकार
सामंजस्य बिना विवाह बेकार
बांटों नहीं तो ज्ञान बेकार
प्यार बिना इंसान बेकार
96-41-23-2-2014

जीवन.जीवन मन्त्र,धैर्य,सहनशीलता,
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

My soul


Abundant  love
Lot of hate
My haunted past
All that is buried
In my heart
Embedded
In my mind
Does not bother me
I am bothered
Only about
My soul?
If I am able to
Keep it clean
I would feel
My life
Has proved
Its worth
Fulfilled
God’s desires
95-40-23-2-2014
Life,love,hate ,soul,

Dr.Rajendra Tela,Nirantar

Summer


Giving Relief
From cold winds
Chilling winter
Rubbing the spring
Here comes summer
Announcing 
The world
It is the season for
Budding roses
Mouth watering
Mangoes
Sweet melons
Long days
Short nights
Sun at its peak
Hot winds
Increased thirst
Welcoming
A cool drink
Time for travel
Relaxed holidaying
Enjoy wonderful
Sight seeing
94-39-23-2-2014
Summer,season

Dr.Rajendra Tela,Nirantar