Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

On seeing her smiling


On seeing her smiling
Every time I met her
I used to ask myself
How can one smile
All the time
She also
Must be having
Some worries
Few things must
Be paining
Must be getting sick
At times
The question kept on
Bothering my head
Till the time
She answered
My query
What she said was
Astounding truth
I too have
Moments of agony
Neither can one get
Happiness
By crying and frowning
Nor one has the right
To make others unhappy
So why not smile
Reduce your gloom
As well as
Keep others happy
79-24-14-2-2014
Smile,smiling,crying,frowning,
happiness

Dr.Rajendra Tela,Nirantar 

शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

I do not know from where she came


I do not know
From where she came
Where did she go
Was she an angel
Came from heaven
Or
A beautiful human
Given birth by
A woman
Whosoever she was
To me she was
A divine power
Which caught my
Imagination
Captured my heart
Conquered my soul
Mesmerized me
To the extent
I became her slave
She my master
Unfortunately for me
Before I could take
Orders from her
She disappeared
In thin air
78-23-14-2-2014
Beauty,angel,imagination,mesmerized,captured,heart

Dr.Rajendra Tela,Nirantar... 

तुम याद तो आते हो


तुम 
याद तो आते हो
पर तुम्हें
 बताना नहीं
चाहता हूँ
पहले भी निराश
 हुआ हूँ
दोबारा निराश नहीं
होना चाहता हूँ
यादों को मन में
समेट लेता हूँ
किस्मत समझ
खामोशी से 
सह लेता हूँ
77-22-14-2-2014
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

याद, किस्मत

तुम्हें मेरी वेलन्टाइन कहूँ


तुम्हें
मेरी वेलन्टाइन कहूँ
मेरी अर्धांगिनी कहूँ
प्रेमिका कहूँ
हसरतों का मुकाम  कहूँ
दिल की ख्वाहिश कहूँ
मेरी ज़िंदगी कहूँ
खुदा की मेहरबानी कहूँ
चाहे कुछ भी कहूँ
तुम्हारे बिना
मैं कुछ भी नहीं
तुम्हारे सिवाय
मेरा कोई नहीं
तुम हो तो मैं हूँ
तुम नहीं तो
मैं भी नहीं हूँ
मेरे वज़ूद का
कोई मतलब नहीं है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
76-21-14-2-2014
वेलन्टाइन, प्रेमिका.अर्धांगिनी,

हसरत,ख्वहाहिश, प्यार.मोहब्बत  

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

Tears are my most trusted friends


Tears are
My most trusted friends
Never ditch me
Come out to help me
Whenever I need them
Understand my feelings
More than
Any person near me
In victory in defeat
They flow freely
In pain in happiness
They come out silently
To support me
How to repay their debt
The question always
Bothers me
75-20-13-2-2014
Tears,friendship,trust,life 

Dr.Rajendra Tela,Nirantar

मन में खुद्दारी बहुत थी


मन में 
खुद्दारी बहुत थी
सच्चाई की 
रड़क भी कम नहीं थी
ऊपर से ईमान का 
पहरा लगा था
मगर आइना 
दिखाने की आदत 
बहुत अज़ीज़ थी
ज़िंदगी भर 
दुश्मन बनाता रहा
उम्र के हर दौर में 
अकेला रहा
मगर मन में 
कोई मलाल नहीं
ये मेरी नहीं 
उसूलों की लड़ाई थी
हर हार में भी 
एक जीत थी
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

74-19-13-2-2014
खुद्दारी,आइना दिखाना,
उसूल,जीवन,सच्चाई,ईमान

बुधवार, 12 फ़रवरी 2014

Poem comes out of the heart


I decided to write
A poem
Used choicest
Words
Decorated it with
Rhyming words
Appropriate
Synonyms
Took care of
The grammar
Satisfied with
The out come
I asked
My friend’s son
To read it
Tell me
If he liked
To my
Utter surprise
The young fellow
Told me
Uncle
Poem comes
From the heart
It cannot be
Designed
I blushed
Nodded my head
In agreement
To what the young
Child taught me
73-18-12-2-2014
Poem,life,child,synonyms,words,write

Dr.Rajendra Tela,Nirantar

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2014

हर मौसम में खिलता हूँ


चमेली जैसे
महकता नहीं हूँ
गुलाब
जैसा सुन्दर नहीं हूँ
गुल दाउदी
जैसे लुभाता नहीं हूँ
आर्किड जैसे
हँसता नहीं हूँ
ढेलिया जैसे
सजता संवरता नहीं हूँ
पर बहुत प्रसन्न हूँ
सदा बहार के फूल
जैसा हूँ
हर मौसम में खिलता हूँ
सीधा सरल दिखता हूँ
श्रृंगार बिना जीता हूँ
निरंतर मुस्काराता हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
72-17-11-2-2014
चमेली,गुल दाउदी.गुलाब.डेहलिया,
आर्किड ,सदाबहार, जीवन,जीवन मन्त्र,

निरंतर

सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

आज के मन


कुंठा से
भरे हैं मन
दुविधा में
डूबे है मन
अहम् से
भरे हैं मन
सीमाओं में
बंधे हैं मन
उन्मुक्त जीना
सहज जीना
निश्छल जीना
निश्चिंत जीना
निस्वार्थ जीना
चुपचाप सहना
भूल गए हैं
आज के मन
71-16-10-2-2014

कुंठा दुविधा,मन,अहम्,जीवन
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

मेरे मन के अंदर एक बच्चा


मेरे मन के अंदर
एक बच्चा
बच्चे के मन में भी
एक बच्चा
ढेर सारे बच्चे
ढेर सारे मन
उम्र हो गयी
पढ़ लिख गया
परिवार बढ़ गया
मज़बूरी में बड़ा
बन के रहना पड़ता है
भाग्य शाली हूँ
मन के ढेर सारे बच्चे
उछल कूद
मचाना नहीं छोड़ते
मुझे बड़ा नहीं होने देते
70-15-10-2-2014
मन,बच्चा,जीवन,बचपन,

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

मैंने सच के पैर नहीं देखे


मैंने सच के 
पैर नहीं देखे
ना ही झूठ का 

धड़ देखा है
परिणाम 

अवश्य देखा है
उसी से 

अंदाज़ लगाता हूँ
सच ताकतवर तो होगा
मगर जुबान का
कड़वा होता होगा
देखने में सुन्दर नहीं
पर उसका मन
सुन्दर होता होगा
झूठ चेहरे से सुन्दर
शरीर से सुडोल
मन से 

विकृत होता होगा
सोचता हूँ
फिर भी क्यों लोग
झूठ से 

प्रभावित होते हैं
सच से 

मुंह छुपाते हैं 


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
69-14-10-2-2014
सच ,झूठ,जीवन,

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

रविवार, 9 फ़रवरी 2014

ह्रदय में वही बसा था मन उसी में रमा था


आकाश  से गिरा
पहाड़ों में पसरा
फिसलते फिसलते
ज़मीन पर पहुंचा
भटकते भटकते
समंदर में जा मिला
भाप बन कर
हवाओं के साथ
उड़ चला
ना कोई रोक सका
ना अपना बना सका
जिसका था
उसी का रहा
पानी का क़तरा था
पानी का क़तरा ही रहा
मेरा इष्ट
आकाश में था
कोई खुदा
कोई ईश्वर कहता
उसको
ह्रदय में वही बसा था
मन उसी में रमा था
उसे छोड़ किसी का
कैसे हो सकता था


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
68-13-09-2-2014

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर.

आँखों में चमक थी दिल में जोश भी कम ना था


आँखों में चमक थी
दिल में
जोश भी कम ना था
जज़बे में आग थी
होंसला पर्वत की
ऊंचाइयों को छू रहा था
कुछ कर गुजरने की
तमन्ना ने
हिम्मत को बढ़ा दिया
भाग्य ने उसे फ़ौज़ में
सिपाही बना दिया
जो चाहता था
उसने करके दिखा दिया
एक दिन देश के लिए
शहीद हो गया
दुनिया में अपना नाम
अमर कर गया
67-12-09-2-2014
शहीद,अमर,देश भक्त,हिम्मत ,होंसला,जोश,फ़ौज,फौजी,

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर