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शनिवार, 18 जनवरी 2014

किस रात की बात करूँ


तुम्ही बताओ
किस रात की बात करूँ
उस रात की
 जब चाँद
सितारों की ओढ़नी
ओढ़े पूरे शवाब पर था
 उस रात की बात करूँ
जब चांदनी ने ज़मीं को
अपने आगोश में
समेट ले लिया था
उस रात की बात करूँ
जब तुम्हारी
ख़ूबसूरती देख कर
चाँद बादलों के पीछे
छुप गया था
चांदनी शरमा कर
गुम हो गयी थी

तुम्ही बताओ 
किस रात की बात करूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
25-25-18-01-2014

चाँद,चांदनी,रात,शवाब,आगोश,बादल

मन मंथन


समुद्र मंथन से
अमृत निकला था
मन मंथन से
मन अमृत
समान होता
विचारों के मंथन से
सार्थक विचारों का
जन्म होता
अच्छे बुरे में भेद
पता चलता
जीवन में उतारने से
विपत्तियों का
समाधान होता
जीवन सुगम होता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
24-24-18-01-2014
जीवन,जीवन पथ,मन मंथन,विचार ,जीवन मन्त्र,

शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

Lack of Determination


Whenever
I committed 
A mistake
I decided 
Not to repeat it
Some I did not
Some I did
To find out
Why I
Repeated
The few
I talked to myself
Came to the
Conclusion
Determination
Was lacking in
My attitude
23-23-17-01-2014
Determination,attitude,life,motivation

Dr.Rajendra Tela,Nirantar  

When ever diffculties came


When ever
Difficulties came
In my life
I felt
As if I have to
Climb
A big mountain
Swim in a deep sea
The thought
Used to
Make me cry
Inspite of
Lot of crying
Nothing happened
Ultimately
I had to myself
Find the way out
Now I realize
I should not have
Cried
As difficulties
Can be solved
Only by Patience
Hard work
And
Positive attitude
Not by
Wetting the eyes
22-22-17-01-2014
Difficulties,crying,life,attitude,patience,motivational
Dr.Rajendra Tela,Nirantar 

बुधवार, 15 जनवरी 2014

मिथ्या प्रशंसा


मिथ्या प्रशंसा
भ्रम को जन्मती
मति अतिविश्वास
से भरती 
अहम् की अग्नि 
स्वभाव में 
प्रवेश करती 
 लक्ष्य से दृष्टि
पथ भ्रष्ट होती
परिणिति
असफलता में होती 
निराशा को
निमंत्रण देती 

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
21-21-15-01-2014

जीवन ,जीवन मन्त्र,मिथ्या प्रशंसा,प्रशंसा,अहम् ,अतिविश्वास

मंगलवार, 14 जनवरी 2014

सोच की आंधी में


हर नए
सोच की आंधी में
यादों के तिनके
साथ में आ जाते हैं
नए सोच को
पूर्व में घटित
किसी ना किसी
बात से जोड़ते हैं
निर्णय
करने से पहले
बार बार मंथन
करने को
बाध्य करते हैं
20-20-14-01-2014
सोच,यादें,मंथन,जीवन,निर्णय

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर     

हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है


कभी सोचता था
उम्र के साथ 
अनुभव भी ले लिया
पर हर दिन जब
एक नयी स्थिति से
सामना होता है
लगता है अब भी
बहुत कुछ सीखना है
देर से समझा मगर
अब समझ गया हूँ
जीवन में कभी कोई
परिपूर्ण नहीं होता
ह्रदय के द्वार
मन के चक्षुः खुले हों
हर दिन कुछ नया
सीखने को मिलता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
19-19-14-01-2014
,सीखना ,अनुभव,जीवन जीवन मन्त्र

कैसे सम्भव है?


परमात्मा से
नित्य प्रार्थना करते हो
शांति की चाह रखते हो
चेहरा उत्तर की ओर
दृष्टि हिमालय की
शिलाओं पर टिकी
मन में अपार इच्छाएं बसी
मोह से मुक्ति नहीं मिली
दक्षिण में रामेश्वरम के
दर्शन चाहते हो
शांति पथ पर
एक कदम भी नहीं बढ़ाते हो
तुम्ही बताओ यह
कैसे सम्भव है?
उल्टी गंगा कैसे बहेगी?
जीवन में शान्ति
कैसे मिलेगी?

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
18-18-14-01-2014
परमात्मा,प्रार्थना,मोह,शांति,इच्छाएं,जीवन जीवन मन्त्र

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

सोमवार, 13 जनवरी 2014

पथ भ्रष्ट


लोग रास्ते से
भटके हैं
बहस में अटके हैं
यथार्थ से दूर
स्व्यं को श्रेष्ठ 
सिद्ध करने में
उलझे हैं
अहम् की तुष्टिं
में फंसे हैं
17-17-13-01-2014
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

अहम्.तुष्टि,पथ भ्रष्ट ,बहस,श्रेष्ठ ,जीवन