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रविवार, 9 नवंबर 2014

कहने को तो बहुत कुछ कह सकता हूँ

कहने को तो बहुत कुछ कह सकता हूँ

कहने को तो
बहुत कुछ
कह सकता हूँ
लम्बी लम्बी बातें
कर सकता हूँ
आवश्यक हो तो
चुप भी रहता हूँ
पर उतना ही
कहता हूँ
सुनने वाला
ना झुंझलाए
ना समय गँवाए
आसानी से
समझ जाए
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
539-02-09-11-2014

संवाद,कहना,सुनना.जीवन,selected 

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