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शनिवार, 18 अक्तूबर 2014

क्या हुआ अगर आज मन उदास है


क्या हुआ अगर
आज मन उदास है
मन को मनाऊंगा
हृदय को समझाऊंगा
कल स्थितियों से
समझौता कर लूंगा
अगर बार बार
ऐसा ही होता रहेगा
तो कब तक
मन को मनाऊंगा
हृदय को समझाऊंगा
एक दिन थक जाऊंगा
निराशा के भंवर में
डूब जाऊंगा
भाग्य को दोष दूंगा
उदासी तो फिर भी
दूर नहीं कर पाऊंगा
क्यों ना फिर
जो हो रहा है उसे
खुशी से स्वीकार करूँ
सकारात्मक
सोच रख कर
सार्थक करने का
प्रयास करता रहूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
525-16-18--10-2014

सकारात्मक सोच, जीवन,जीवन मन्त्र, भाग्य,

1 टिप्पणी:

  1. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 20/10/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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