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बुधवार, 22 अक्तूबर 2014

किसी की मानूं ना मानूं

किसी की मानूं ना मानूं

किसी की मानूं
ना मानूं
आईने की हर बात
मान लेता हूँ
चेहरे की
झुर्रियों से ले कर
चेहरे के दाग तक
दिखा देता है
डरता हूँ
कहीं नाराज हो कर
दिल में छुपे राज
दुनिया को नहीं बता दे
इसलिए आईने को
सदा खुश रखता हूँ
उसकी हर बात को
सर झुका कर
मान लेता हूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
530-21-22--10-2014

आइना,ज़िंदगी,

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