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शनिवार, 11 अक्तूबर 2014

फूलों की ख्वाहिश में


फूलों की
ख्वाहिश में
काँटों से पाला पड़ा
ज़ख्म खाकर
हमने
इरादा बदल दिया
जो भी मिला
उसी से
दिल लगा लिया
काँटों को भी
फूल समझ कर
अपना बना लिया 
 © डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
512-04-11--10-2014

प्रेम.ख्वाहिश,प्यार,मोहब्बत

2 टिप्‍पणियां:

  1. जीना इसी का नाम है .. बहुत सुन्दर भावपूर्ण !!

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 13/10/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

    उत्तर देंहटाएं