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रविवार, 7 सितंबर 2014

स्थायित्व




मुझे भी
तुम्हारी उतनी ही
आवश्यकता है
जितनी तुमको मेरी
मुझे अगर लेना है
तो देना  भी पडेगा
संबंधों को
स्थायित्व देना है तो
कदम से कदम
मिला कर चलना होगा
सुख दुःख दोनों में
साथ निभाना होगा
कुछ अपना छोड़ना होगा
कुछ तुम्हारा
स्वीकार करना होगा
तुम्हें अपने बराबर
समझना होगा
निस्वार्थ जीना होगा

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
472-12-07--09-2014  
निस्वार्थ,सम्बन्ध,रिश्ते,जीवन , स्थायित्व ,selected

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