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बुधवार, 3 सितंबर 2014

पहले खुद के मन को बदलूं




कभी सोचता था

सीधे सादे सच्चे मन का स्वामी हूँ
समय के साथ पता चला
मेरा मन भी टेढ़ा है
पूर्वाग्रह से ग्रस्त है
निरंतर लोगों को
अपने बनाये पैमानों से तोलता है
जैसा वो चाहे सब वैसा ही करें
नहीं करे तो ऊँगली उठाता है
खुद को ईमानदार
दूसरों को बेईमान 
समझता है
अब तय कर लिया है
पहले खुद के मन को बदलूं
फिर दूसरों से
 बदलने की 
आशा करूँ      
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
465-05-03--09-2014  
मन,समय.पूर्वाग्रह,जीवन,

1 टिप्पणी:

  1. सुन्दर सोच ... हर बदलाव की शुरुआत स्वयं से ही करनी चाहिए..

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