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बुधवार, 17 सितंबर 2014

ऐसी कैसी सुबह आयी ?




मुर्गे ने बांग दी

सूरज ने अंगडाई ली

घर के पिछवाड़े

गाय रम्भाई

चिड़िया ने आँखें खोली

मेरी भी निद्रा टूटी

दरवाज़े की कुण्डी खोली

नज़रें अखबार पर पडी

खबरें तो सारी कल की थी

बार बार आँखें मली

एक खबर भी नहीं बदली

कल भी

नारी की अस्मत लुटी थी

ह्त्या,दुर्घटना लूट हुयी थी

आज भी

वही कहानी दोहराई गयी

ऐसी कैसी सुबह आयी

इससे तो बिना अखबार की

रात अच्छी थी
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
495-35-17--09-2014
अखबार,सुबह,समाचार,खबर,SELECTED

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