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शनिवार, 20 सितंबर 2014

गहरी नींद से जागता है




गहरी नींद से जागता है

सवेरे को उजाले से

नहलाता है

मन में आशाएं जगाता है

अपने ताप से सड़क पर

जमे हुए कोलतार को

पिघलाता है

नंगे पैरों को झुलसाता है

ठंडी हवाओं को

दहकती लू में बदलता है

शाम ढले क्षितिज के

पीछे छुप जाता है

ये सूरज भी

क्या क्या रंग दिखाता है

हर दिन जीवन का
रंग रूप दर्शाता है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
500-40-20--09-2014
जीवन, सूर्य,सूरज

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