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गुरुवार, 11 सितंबर 2014

दिन भर की ज़द्दोज़हद के बाद





दिन भर की

ज़द्दोज़हद के बाद

शाम को घर के दरवाज़े में

कदम रखते ही

बगीचे में

खिले फूलों को देख कर

प्रतीत होने लगता है

मेरे चेहरे की तरह

बगीचे में खिले फूलो की

ताज़गी भी बढ़ गयी

महक भी पहले से

अधिक तीव्र हो गयी

हैरानी में एक दिन

फूलों से कारण पूछ लिया

गुलाब का फूल

मुस्काराते हुए कहने लगा

तुम दिन भर लोगों के

बीच रहते हो

शाम तक थक कर

चूर हो जाते हो

तुम्हेँ लोगों से 

वो अपनत्व नहीं मिलता

जो चाहनेवालों से मिलता है

यही हाल हमारा है

तुम हमें हृदय से चाहते हो

हम भी तुम्हेँ हृदय से चाहते हैं

फिर भला तुमको देखते ही

हमारे चेहरे की ताजगी

और महक क्यों नहीं बढ़ेगी

तुम भी तो हमें देखते ही

प्रसन्न हो जाते हो

दिन भर की थकान को

पल भर में भूल जाते हो
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
481-21-11--09-2014
थकान,जीवन,ताज़गी,चाहत, selected

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