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गुरुवार, 11 सितंबर 2014

उम्र अब किस्से सुनाने की नहीं




उम्र अब

किस्से सुनाने की नहीं

किस्सों से सीखने की है

ईर्ष्या द्वेष होड़ की नहीं 

स्नेह प्रेम से जीने की है

अनुभवों से

दूसरों को सिखाने की है

नए रिश्ते बनाने से पहले

टूटे रिश्तों को जोड़ने की है

किये अपराधों के 

प्रायश्चित करने की है

परमात्मा से दूरी

कम करने की है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
480-20-11--09-2014
उम्र,बुढ़ापा,वृद्धावस्था,जीवन,selected

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