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शनिवार, 23 अगस्त 2014

कोई तो है




ये जीने का होंसला

कहाँ से आता है

ये गिर गिर कर उठना

कौन सिखाता है

अगर जानता तो

कभी गिरता ही नहीं

ना होंसला हारता कभी

कोई तो है

जो ऊपर से देखता है

सच्चाई और ईमान को

पहचानता है

हर बार घबराने पर

हाथ पकड़ता है

हताश होने पर

गोद मेंउठाता है

निराशा के समय

आशाओं के सूरज

दिखाता है

दुखों पर विजय पाकर

आगे बढ़ने को कहता है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन,ईश्वर,हताश,निराशा,परमात्मा,selected
447-08-22--08-2014

3 टिप्‍पणियां:

  1. आत्मा ही परमात्मा है, उसी से मिलती है सहनशीलता .... वही दिशा देता है

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  2. आत्मशक्ति के साथ आशा और कोशिश .....!

    उत्तर देंहटाएं
  3. परमपिता...वही तो है दिशा दिखाने वाला...,

    उत्तर देंहटाएं