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शनिवार, 23 अगस्त 2014

कहने को तो



कहने को तो

खूबसूरत चेहरों को

देख कर

दिल की धड़कन 
अब भी

बढ़ने लगती है

पर उम्र की

नजाकत समझ गया हूँ

वक़्त की हकीकत

पहचान गया हूँ

दायरे में बंध गया हूँ

कहाँ रुकना है

जान गया हूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
449-10-23--08-2014
उम्र,दायरा,खूबसूरती,ज़िंदगी,selected

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