ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

नारी पर कविता-अबला नारी





उसे धन दौलत

आवरण गहने

सुख सुविधा के

साधन नहीं 

प्रेम भरा आलिंगन

उन्मुक्त जीवन

परस्पर विश्वास

स्नेहपूर्ण जीवन
चाहिए था

वह उसे 
मिल नहीं सका

विवाह के

पुरूस्कार में मिला

तिरस्कार 

अहंकार भरा व्यवहार

नित्य की प्रताड़ना

हवस का बंधन

पुरुष की ताकत का

घिनौना प्रदर्शन

अबला नारी

जिस सम्मान की

हक़दार थी

वह एक दिन भी

उसे नहीं मिला

एक दिन तो

जान देनी ही थी

समय से पहले ही

उसने खुद को

फांसी लगा कर ले ली

सदा के लिए

अत्याचारों से

मुक्ति पा ली

जाते जाते

ढकोसले से भरे

खोखले समाज की 

पोल खोल डाली

एक बार फिर वही

त्रासदी दोहराई गयी     
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
456-17-29--08-2014
नारी,अबला नारी,सम्मान,जीवन, समाज,selected

1 टिप्पणी:

  1. अच्छा जीवन अच्छा साथ सब भाग्य की बात है... किन्तु आज भाग्य भी क्या करें अच्छे लोग...बचे ही नहीं दुनिया में ... औरत की पीड़ादेह स्थिति को व्यक्त करती उम्दा रचना !!

    उत्तर देंहटाएं