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गुरुवार, 17 जुलाई 2014

मनोवेदना


मैं आहत हूँ
स्तब्ध हूँ
व्यथित हूँ
लाचार हूँ
मौन हूँ
इससे अधिक
लिखूं भी तो
क्या लिखूं
मनोवेदना 
समझाने के लिए
क्या इतना ही
पर्याप्त नहीं है

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
437-48-16--07-2014
मनोवेदना  ,आहत ,स्तब्ध,व्यथित,लाचार,मौन,selected

1 टिप्पणी:

  1. कभी कभी कम शब्द अधिक बाते समझा जाती है जो अधिक शब्द भी नहीं बता पाते.....सुन्दर लिखा है आपने !!

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