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बुधवार, 9 जुलाई 2014

बचपन पर कविता- उन्मुक्त बचपन


बचपन पर कविता- उन्मुक्त बचपन
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उन्मुक्त बचपन
के उन्मुक्त दिन
ना प्यास की चिंता
ना भोजन का ध्यान
ना माया मोह का लोभ
ना जाती धर्म का ज्ञान
ना कर्म की बेड़ियां
ना कर्तव्य का भान
ना लक्ष्य का पता
ना समय का बंधन
ना उचित
अनुचित का सोच
ना उंच नीच का भाव
ना सम्मान का ख्याल
बचपन का
अपना अलग संसार
खेलना कूदना
आमोद प्रमोद
उसके जीवन का सार
उन्मुक्त बचपन
के उन्मुक्त दिन
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
416-27-09--07-2014

उन्मुक्त, बचपन
बचपन पर कविता

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