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बुधवार, 2 जुलाई 2014

एक सपना टूट गया तुम हार मानने लगे

एक सपना टूट गया 
तुम हार मानने लगे 
एक इच्छा पूरी नहीं हुई 
तुम आसूं बहाने लगे 
एक कदम चले नहीं 
तुम पीछे हटने लगे
जीवन एक कोषागार है 
आशाओं का सागर है
धैर्य उसका धन 
हिम्मत धरोहर है
तुम कोषागार के 
रखवाले  
धैर्य को संजोओ 
धरोहर को संवारों
कर्म के धन से 
कोषागार भरते रहो
निराशा के चोर
हताशा के डाकू 
अवसाद के लुटेरे से 
कोषागार बचाते रहो
जीवन चलने का 
दूसरा नाम 
बिना थके हारे 
निरंतर हँसते गाते 
चलते रहो 
कॉपीराइट@
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
जीवन,धैर्य,हिम्मत,कर्म,निराशा,हताशा,अवसाद,selected

395-06-02--07-2014

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