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शनिवार, 12 जुलाई 2014

कर्म फल


वन उपवन में
चांदी सा चमकते
चमेली के फूल को देखा
काँटों की बीच 
मन लुभावन
गुलाब को देखा
हर सिंगार के
नन्हे फूल को सुगंध
फैलाते देखा
अंगूठी में जड़े नगीने सा
मोगरे के फूल को देखा
महुआ के फूल को
मदमस्त महक से
बहकते देखा
सब की कद काठी
रंग रूप
पौधे अलग अलग
सबके सब महक के
गुण से भरे हुए
सोचा तो
मन में विचार आया
इन्हें अवश्य कर्मों का
फल मिला होगा
तभी सब फूल
महक से भरे हुए हैं
ऐसे फूल भी
संसार में बहुत हैं
जो जीवन में
कभी नहीं महकते
उन के
कर्म ही ऐसे रहे होंगे
महक के गुण से
सदा वंचित रहते
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
426-37-12--07-2014

कर्म, गुण, जीवन,जीवन मन्त्र,प्रकृति, महक,selected

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