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बुधवार, 2 जुलाई 2014

मेरी बातें मेरी ही नहीं होती हैं


मेरी बातें
मेरी ही नहीं होती हैं
कई यादें
साथ में जुडी होती है
कइयों की
बातें मिली होती हैं
कई घटनाओं की
छाप होती हैं
जो भुगता सहा
उसकी
अभिव्यक्ति होती है
मन के नेपथ्य में छुपी
बचपन से
जवानी तक की
हर बात होती है
कार्य कलापों की
छाया होती है
ह्रदय से निकली
सच्चाई होती है
मेरी बातें
मेरी ही नहीं होती
कई बातें
उनमें मिली होती हैं
कॉपीराइट@
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
यादें ,जीवन,अनुभव,बातें, घटनाएं ,selected
396-07-02--07-2014

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