ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

सोमवार, 23 जून 2014

उसे बेइमान कहना


उसका एक शब्द
तीर की तरह
हृदय में चुभ गया
मन को झंझोड़ गया
अहम् को जगा गया
संबंधों के हर सेतु को
ध्वस्त कर गया
प्रत्युत्तर में
मेरा उसे
बेइमान कहना
मेरे ईमान पर ही
सैकड़ों प्रश्न खडा
कर गया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
कॉपीराइट@
369-66-23--06-2014

सम्बन्ध,अहम,रिश्ते,जीवन, ईमान,selected 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें