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शुक्रवार, 13 जून 2014

कल का दिन बहुत अच्छा गुजरा


कल का दिन
बहुत अच्छा गुजरा
सुबह अखबार नहीं आया
ह्त्या बलात्कार
दुर्घटना भ्रष्टाचार की
खबरें पढने से बच गया
बिजली विभाग के
कर्मचारियों की
हड़ताल हो गयी
लैपटॉप सो गया
टी वी केबल भी
खामोश हो गया
सनसनी खेज़ खबरें
सास बहु के
घिसे पिटे सीरिअल
देखने से बच गया
मोबाइल पानी में गिर गया
मौत की गोद में सो गया
ना किसी का फ़ोन आया
ना किसी को कर सका
फेस बुक व्हाट्स ऍप के
मोह से बच गया
नितांत अकेला रहा गया 
पूरा दिन खुद से ही
बातें करता रहा
जिन्हें भूल गया था
उन्हें याद करता रहा
कल का दिन
बहुत अच्छा गुजरा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
सामयिक,कल,आज,जीवन, फेस बुक व्हाट्स ऍप, ,हास्य,व्यंग्य

331-29-13--06-2014

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