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सोमवार, 9 जून 2014

किसी ने नहीं सिखाया


बचपन से युवा बनने तक
किसी ने नहीं सिखाया 
अपनी कमियां उजागर करूँ
सदा यही समझाया गया
कमियों को छुपा कर रखूँ
झूठ का आवरण ओढूँ
कोई पूछे तो मुस्कराकर कहूँ
उनके जितना ही सक्षम हूँ
उम्र और अनुभव के
उपरान्त अब सोचता हूँ
अगर बाल्यकाल  से ही
हिम्मत कर के,
हीन भावना से मुक्त हो कर
अपनी कमियों के बारे में
अनुभवी लोगों से अग्रजों से
गुरूओं से,निपुण लोगों से
समय समय पर चर्चा करता
उनका मार्ग दर्शन लेता
जिनके कारण
जीवन भर कुंठित रहा
उन कमियों को
दूर कर सकता था
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
कमियां,अनुभव,जीवन,सीख,मार्ग दर्शन  

322-19--09--06-2014

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