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सोमवार, 16 जून 2014

ह्रदय पर ताले


घरों के मानिंद  
लोग ह्रदय पर भी
ताले लगा कर
रखने लगे हैं
ह्रदय में भरा
प्रेम भण्डार
कोई चुरा नहीं ले
भय में प्रेम करना ही
भूल गए हैं
अब ना समझने वाले
ना समझाने वाले 
बचे हैं
जो समझाए
प्रेम बांटने से 
घटता नहीं
बढ़ता हैं
जितना बांटों
उतना ही फलता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
प्रेम,प्यार,मोहब्बत,ज़िंदगी,जीवन,शायरी, ह्रदय

342-40-16--06-2014

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