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मंगलवार, 3 जून 2014

समय के साथ बदल क्यों जाता हूँ


किसी के अंतिम संस्कार में
शमशान स्थल जाता हूँ
स्वयं को असहज पाता हूँ
शमशान वैराग्य में
डूब जाता हूँ
किसी विवाह समारोह में
जाता हूँ
खुशी में नाचने लगता हूँ
किसी गरीब को रोते देखता हूँ
रोने लगता हूँ
बम धमाके में लोगों के
मरने का समाचार सुनता हूँ
दहल जाता हूँ
किसी निशक्त से दुर्व्यवहार
होते देखता हूँ
क्रोध में उबलने लगता हूँ
सोचता हूँ इतना स्वार्थी
कैसे हो गया हूँ
समय के साथ बदल 
क्यों जाता हूँ
अवसर के बाद 
भूल क्यों जाता हूँ 
हर समय 
संवेदनशील हो कर
क्यों जी नहीं पाता हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
समय,स्वार्थ,स्वार्थी,संवेदनशील,जीवन

312-09--03--06-2014

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