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मंगलवार, 24 जून 2014

बंद खिड़कियों के मकान


कुछ लोग
बंद खिड़कियों के
मकान जैसे होते हैं
जिसमें ना ताज़ी हवा
अंदर आ सकती है
ना बासी हवा
बाहर जा सकती है
कुंठित सोच से जीते हैं
स्वयं को अधिक
समझदार समझते हैं
अंदर ही अंदर
कुंठा की बासी हवा में
घुटते रहते हैं
सत्य के विपरीत
भ्रम में जीते हैं
कॉपीराइट@
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
372-68-24--06-2014

selected ,कुंठा,कुंठित,श्रेष्ठ,जीवन,समझदार

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