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सोमवार, 2 जून 2014

आइनों की हिम्मत


कभी कभी आइनों की
हिम्मत देख कर
इर्ष्या होने लगती है
गहराई से सोचता हूँ
ईर्ष्या सहानुभूति में
बदलती है
उनकी व्यथा को देख कर
व्यथित होता हूँ
सहनशक्ति को देख कर
उन्हें नमन करता हूँ
उनकी हिम्मत की
ह्रदय से
प्रशंसा करता  हूँ
झूठ को सच
दिखाते दिखाते भी
कभी थकते नहीं है
चेहरों का सच
जानने के बाद भी
कभी टूटते नहीं हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
आइना,हिम्मत,व्यथा,

308-05--02--06-2014

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