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गुरुवार, 29 मई 2014

मनोयोग से


अस्त होते सूर्य ने
उगते सूर्य से पूछा
क्यों खुशी में दमक रहे हो
तीव्रता से चमक रहे हो
पूर्ण वेग से रश्मियाँ
बिखेर रहे हो
मेरे जैसे ही एक दिन
तुम्हें भी मंद पढ़ना होगा
क्षितिज के आँचल में
समाना होगा
खुशियों को नियंत्रित करो
कुछ ऊर्जा बचा कर रखो
उगता सूर्य बोला
आपकी बात समझता हूँ
जीवन की नियति जानता हूँ
आपके जैसे ही मुझे भी
एक दिन अस्त होना होगा
इसलिए जी भर कर
चमक रहा हूँ
फिर अवसर मिले ना मिले
पूर्ण मनोयोग से
रश्मियाँ बिखेर रहा हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन,जीवन मन्त्र,नियति,सूर्य, मनोयोग से

292-59--29--05-2014

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