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शनिवार, 24 मई 2014

आज भी चल रहा हूँ कल भी चलता रहूँगा


ना आज को
कोसता हूँ
ना कल को
याद कर रोता हूँ
कल क्या करना है
सोचता हूँ
ना होड़ में जीता हूँ
ना सपने देखता हूँ
पुरुषार्थ पर
विश्वास रखता हूँ
हार में
निराश नहीं होता हूँ
त्रुटियों से सीखता हूँ
निरंतर कर्म पथ पर
चलता रहा हूँ
आज भी चल रहा हूँ
कल भी चलता रहूँगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
275-42--24--05-2014
जीवन.जीवन मन्त्र,कर्म,पुरुषार्थ

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