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सोमवार, 5 मई 2014

हर पटाखे के साथ मैं भी जलता हूँ


दीपावली पर
हर पटाखे के साथ
मैं भी जलता हूँ
हर दिए के साथ
मैं भी सुलगता हूँ
इतनी बार जलता
सुलगता हूँ
दर्द से फट जाता हूँ
बिलख बिलख कर
रोता हूँ
जब गरीब के पास
खाने को रोटी नहीं
सर पर छत नहीं
पीने को 
स्वच्छ पानी नहीं
तन ढकने को वस्त्र नहीं
नारी सुरक्षित नहीं
बच्चों को शिक्षा नहीं
बुजुर्गों को सम्मान नहीं
संबंधों में विश्वास नहीं
सिवाय रोने के
क्या कर सकता हूँ
दीपावली पर खुशी
कैसे मना सकता हूँ

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
दीपावली, खुशी,गरीब,त्योंहार
242-09--05--05-2014


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